बारिश में नाला सफाई पर उठे सवाल, लोगों ने कहा- “पहले होती तैयारी तो नहीं होती परेशानी”

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 जून 2026,

गयाजी: मानसून की दस्तक के साथ ही गया नगर निगम क्षेत्र में नालियों और बड़े नालों की सफाई का अभियान जोर-शोर से चल रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में मशीनों और सफाईकर्मियों के माध्यम से नालों से गाद और कचरा निकाला जा रहा है। नगर निगम का दावा है कि जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, इस अभियान के समय को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

बरसात में ही क्यों याद आती है सफाई?”

स्थानीय निवासी श्रवण कुमार का कहना है कि हर वर्ष नगर निगम बारिश शुरू होने के थोड़े पहले ही सफाई अभियान चलाता है।
अगर वास्तव में जलजमाव की समस्या से निजात दिलानी है तो नालों की सफाई अप्रैल और मई में ही शुरू हो जानी चाहिए थी। बरसात आने के बाद सफाई शुरू करने का कोई विशेष लाभ नहीं दिखता।

उन्होंने आगे कहा कि समय पर नालों की सफाई होने से बरसात के दौरान शहर में जलजमाव, गंदगी और मच्छरों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती थी।

“निकली हुई गंदगी फिर नालियों में चली जाती है”

स्थानीय निवासी मुकेश यादव ने भी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा,
“बारिश के मौसम में नालों से निकाली गई गाद और कचरा कई बार घंटों या दिनों तक सड़क किनारे पड़ा रहता है। बारिश होने पर वही गंदगी पुनः नालियों और नालों में बहकर चली जाती है, जिससे सफाई अभियान का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि यदि सफाई कार्य समय से किया जाए और निकाली गई गंदगी का तत्काल उठाव हो तो शहर को काफी हद तक जलजमाव से बचाया जा सकता है।

व्यापारियों और राहगीरों की भी बढ़ी परेशानी

शहर के एक दुकानदार राजेश प्रसाद ने बताया कि नालों से निकाली गई गाद सड़क किनारे पड़े रहने से दुर्गंध फैल रही है और ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है।
“नगर निगम को सफाई के साथ-साथ कचरे के तत्काल निष्पादन की भी व्यवस्था करनी चाहिए।”

वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी रीना देवी ने कहा,
“बरसात शुरू होने से पहले अगर तैयारी पूरी कर ली जाती तो आज लोगों को जलजमाव और गंदगी का सामना नहीं करना पड़ता।”

हर वर्ष उठता है यही सवाल

शहरवासियों का कहना है कि नाला सफाई का मुद्दा हर वर्ष मानसून के दौरान चर्चा का विषय बन जाता है। लोगों का मानना है कि नगर निगम को एक दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाकर प्री-मानसून तैयारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि बारिश के दौरान शहर को जलजमाव और गंदगी से बचाया जा सके।

नगर निगम से लोगों की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:

  • नालों और नालियों की सफाई अप्रैल-मई में ही पूरी कर ली जाए।
  • निकाली गई गाद और कचरे का तत्काल उठाव सुनिश्चित किया जाए।
  • जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
  • जलजमाव वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर विशेष तैयारी की जाए।

गया नगर निगम का सफाई अभियान निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसके समय और कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि केवल मानसून के दौरान सक्रियता दिखाने के बजाय सालभर की सुनियोजित तैयारी ही शहरवासियों को वास्तविक राहत दिला सकती है।

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