चार साल बाद मिला न्याय? बेगूसराय के चर्चित वार्डेन मौत मामले में बड़ा खुलासा, पुनः जांच में दो आरोपी गिरफ्तार
आर्यावर्त वाणी | बेगूसराय | 29 जुलाई 2026,
बेगूसराय: जिले के वीरपुर थाना कांड संख्या-49/2021 से जुड़े बहुचर्चित वार्डेन मौत मामले में चार वर्षों बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र, विकास वैभव द्वारा इस सनसनीखेज कांड की गहनता से जांच कर इसका खुलासा करते हुए दोषियों के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। गयाजी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुनः अनुसंधान के दौरान मिले वैज्ञानिक, तकनीकी, मौखिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कौशल कुमार एवं अजीत कुमार उर्फ बबलू को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
क्या था पूरा मामला?
4 अप्रैल 2021 को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, मुजफ्फरा (वीरपुर) में कार्यरत वार्डेन रिंकू कुमारी का शव विद्यालय परिसर में मिला था। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना गया, लेकिन मृतका की बेटी तेजस्विनी कुमारी उर्फ मोनी कुमारी ने शुरू से ही इसे हत्या बताया।
बेटी ने पुलिस को दिए आवेदन में क्या कहा था?
5 अप्रैल 2021 को वीरपुर थाना में दिए अपने आवेदन में तेजस्विनी कुमारी ने कहा कि उनकी मां रोज़ की तरह 4 अप्रैल को घर से विद्यालय के लिए निकली थीं। उसी दिन दोपहर करीब 2 बजे सूचना मिलने पर जब वह परिजनों के साथ विद्यालय पहुंचीं तो उन्होंने अपनी मां का शव फर्श पर रखा हुआ देखा।
आवेदन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के मोबाइल में शव की ऐसी तस्वीरें थीं, जिनमें शव पंखे से लटका हुआ दिखाई दे रहा था। तेजस्विनी ने पुलिस को दिए आवेदन में स्पष्ट आशंका जताई कि उनकी मां की हत्या की गई और घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया गया। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पुनः जांच
पटना उच्च न्यायालय के आदेश (Cr-WJC No. 259/2022) के बाद इस मामले की पुनः जांच पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र, विकास वैभव के पर्यवेक्षण में गठित विशेष अनुसंधान दल (SIT) द्वारा शुरू की गई। टीम ने मामले की वैज्ञानिक, तकनीकी और विधिसम्मत तरीके से गहन जांच की।
जांच में क्या मिला?
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पुनः अनुसंधान में—
🔹एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी (चश्मदीद) गवाह का बयान दर्ज किया गया।
🔹कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक लेन-देन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच की गई।
🔹भूमि एवं लेन-देन संबंधी विवादों सहित अन्य पहलुओं का भी विश्लेषण किया गया।
एफएसएल और मेडिकल बोर्ड की राय ने बदली जांच की दिशा
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने उपलब्ध फोटोग्राफ और अन्य संकेतों के आधार पर गला दबाकर हत्या (Strangulation) की संभावना जताई। वहीं मेडिकल बोर्ड ने भी अपने मत में कहा कि:
“The probability of strangulation cannot be denied.”
इन वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय निष्कर्षों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांच आगे बढ़ाई गई।
दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार उपलब्ध मौखिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कौशल कुमार एवं अजीत कुमार उर्फ बबलू की प्रथम दृष्टया संलिप्तता प्रमाणित होने पर दोनों को अभियुक्त बनाकर 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
जांच अभी जारी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुनः अनुसंधान अभी समाप्त नहीं हुआ है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या कोई नया साक्ष्य सामने आता है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
