पंजाब फर्जी निवेश स्कीम का काला सच: हाई रिटर्न के लालच में करोड़ की ठगी, पूर्व आईजी ने उठाया खौफनाक कदम

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आर्यावर्त वाणी | नई दिल्ली / पंजाब | 24 दिसंबर 2025,

नई दिल्ली / पंजाब। पंजाब के पटियाला में पूर्व आईजी अमर सिंह चहल साइबर ठगी का शिकार बनने के बाद टूट गए। अविश्वसनीय रिटर्न का सपना दिखाने वाली फर्जी निवेश स्कीम में महज़ दो महीनों में 8.10 करोड़ रुपये गंवाने के बाद सोमवार को उन्होंने खुद को गोली मार ली। फिलहाल उनकी हालत गंभीर है। यह घटना न केवल साइबर अपराधों की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि मानसिक पीड़ा, आर्थिक दबाव और सामाजिक संकोच जैसे पहलुओं पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

ठगों का जाल: डीबीएस बैंक के नाम पर बड़ा खेल

चहल द्वारा छोड़े गए 12 पन्नों के सुसाइड नोट के मुताबिक, ठग वेल्थ मैनेजमेंट एडवाइजर बनकर व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जुड़े थे। ‘एफ-777 डीबीएस वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप’ नाम से बनाए गए इस फर्जी ग्रुप में खुद को डीबीएस बैंक और उसके शीर्ष अधिकारियों से जुड़ा दिखाया गया। फर्जी डैशबोर्ड पर लगातार मुनाफा दिखाया जाता। असामान्य और अविश्वसनीय रिटर्न का लालच दिया गया। भरोसा जीता गया और चहल से लगातार निवेश कराया गया। सबसे गंभीर बात यह कि चहल ने इसमें 7 करोड़ रुपये दोस्तों और परिजनों से उधार लेकर डाले। ठगों का दबाव और नकली मुनाफे का लालच एक अनुभवी पुलिस अधिकारी को भी भ्रमित कर गया।

मानसिक दबाव और अकेलापन: परिवार से छिपाकर लेते रहे डिप्रेशन की दवाइयां

चहल ने इस आर्थिक नुकसान को परिवार से छिपाकर रखा। बेहद तनाव में रहने के बावजूद न तो किसी परिजन को बताया, न किसी साथी अफसर से चर्चा की। नतीजतन, वे अकेले ही तनाव से लड़ते रहे और डिप्रेशन की दवाइयां लेते रहे। वारदात के समय उनका बेटा घर पर था जबकि पत्नी बाहर गई हुई थीं। घटना ने रिश्तों में संवाद की कमी और सामाजिक शर्म के दबाव को भी उजागर किया है।

सुसाइड नोट में चेतावनी और आखिरी अपील

प्रधानमंत्री और डीजीपी के नाम लिखे नोट में चहल ने लिखा—
“सोचा था परिवार को अच्छी जिंदगी दूंगा… लेकिन अब किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहा।” उन्होंने परिवार को सुरक्षा देने की अपील की और घटना की जांच एसआईटी या केंद्र की एजेंसी से कराने की मांग की। चहल ने यह भी लिखा कि पुनर्जन्म हो तो वे फिर एक पुलिस अधिकारी बनना चाहेंगे।

चहल का करियर और पुराने विवाद

अमर सिंह चहल 2019 में रिटायर हुए थे। वे 2015 के बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में आरोपी रहे, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई थी। उनके बेटे-बेटी की शादी हो चुकी है। जीवन की एक स्थिर अवस्था में ठगी का यह बड़ा झटका उनकी मानसिक स्थिति को और कमजोर कर गया।

ठगी से सबक: अविश्वसनीय रिटर्न हमेशा धोखा

यह घटना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है—

🔹हाई रिटर्न का दावा = हमेशा धोखा
🔹सोशल मीडिया ग्रुप पर मिले किसी भी निवेश सलाहकार पर भरोसा न करें
🔹किसी को बड़ी रकम उधार देने या लेने से पहले खुलकर बात करें
🔹मुश्किल में होने पर दोस्तों-परिवार से बातचीत करें
🔹साइबर ठगी का शिकार होना किसी की ‘कमजोरी’ नहीं, अपराधियों की साजिश है

चहल ने यह बात किसी के साथ साझा की होती तो शायद यह दुखद कदम न उठाना पड़ता।

आर्थिक अपराध अब मानसिक स्वास्थ्य का भी संकट

इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि साइबर क्राइम सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं देता, यह मानसिक रूप से भी लोगों को तोड़ देता है।
अनुभवी अधिकारी हो शिक्षित लोग हो या कारोबारी कोई भी इससे सुरक्षित नहीं। समाज, परिवार और सिस्टम सभी को जागरूक और संवेदनशील होना होगा। हर हाई रिटर्न स्कीम पर सवाल उठाएं, हर जोखिम भरे निवेश को जांचें और सबसे ज़रूरी, संवाद बनाए रखें ताकि किसी भी स्थिति में ऐसी नौबत न आ सके।

     🔹साइबर जागरूकता ही हमारी सुरक्षा है🔹

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