सीयूएसबी और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के बीच एमओयू, उद्योग-शिक्षा सहयोग और सतत विकास को मिलेगा बढ़ावा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 27 जून 2026,
गयाजी; दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के बीच उद्योग एवं शिक्षा जगत के सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। कोलकाता स्थित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के कॉर्पोरेट कार्यालय में आयोजित समारोह में दोनों संस्थानों ने शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और सतत विकास के विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।
कुलपति की मौजूदगी में संपन्न हुआ समझौता
एमओयू पर हस्ताक्षर कार्यक्रम में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा तथा भूविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विकल कुमार सिंह उपस्थित रहे। वहीं, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ओर से अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक संजीव कुमार सिंह, निदेशक (ऑपरेशंस) डॉ. संजीव कुमार सिन्हा, निदेशक (वित्त) आर. वी. एन. विश्वेश्वर, निदेशक (खनन) घनश्याम दास गुप्ता और निदेशक (कार्यालय) विकास कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षा और उद्योग के समन्वय से मिलेगा नया आयाम
कुलपति प्रो. के. एन. सिंह ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, खनिज अन्वेषण, अयस्क भूविज्ञान, भू-स्थानिक विश्लेषण, भूजल विज्ञान, पर्यावरण भूविज्ञान, सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण, मत्स्य आधारित आजीविका और ग्रामीण समुदाय विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन, ग्रामीण समृद्धि और समाज की चुनौतियों के ज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को संयुक्त अनुसंधान, इंटर्नशिप, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के नए अवसर प्राप्त होंगे।
झारखंड के घाटशिला में विकसित होगा एकीकृत कृषि मॉडल
एचसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि यह समझौता कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने बताया कि सीयूएसबी के तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग से झारखंड के घाटशिला स्थित खनन क्षेत्र में एकीकृत कृषि मॉडल विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत स्थानीय किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली, सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण, मत्स्य पालन, बागवानी, पशुपालन और उच्च मूल्य वाली नगदी फसलों की वैज्ञानिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा फोकस
परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करना, वर्षभर नियमित आय सुनिश्चित करना और उनकी आय को दोगुना करने की दिशा में प्रभावी प्रयास करना है। इसके साथ ही खनन प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल और जलवायु-लचीली कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, फील्ड अध्ययन, इंटर्नशिप और प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को उद्योग से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी।
