भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की पुष्टि, जांच पर टिकी सबकी निगाहें

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आर्यावर्त वाणी |भोजपुर | 27 जून 2026,

भोजपुर: जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार भरत भूषण तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें चार गोलियां शरीर को आर-पार कर गईं, जबकि एक गोली शरीर के अंदर मिली, जिसे सुरक्षित रख लिया गया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने की ओर से लगी थी। दूसरी गोली बाईं जांघ के मध्य भाग के भीतरी हिस्से में लगी थी। तीसरी गोली दाईं जांघ के मध्य भाग के भीतरी हिस्से में, चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से में तथा पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की ओर से लगी थी।

गौरतलब है कि 17 जून को बिलौटी गांव में पुलिस और भरत तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान भरत तिवारी की ओर से 10 से 15 राउंड फायरिंग की गई, जबकि पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में पांच राउंड गोलियां चलाई थीं। इस मुठभेड़ में पुलिस का कोई जवान घायल नहीं हुआ था।

गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) भेजा गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसी रात दंडाधिकारी की निगरानी में पीएमसीएच में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

पुलिस ने घटनास्थल से एक लोडेड पिस्टल, एक मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद करने का दावा किया है। इस छापेमारी में जिला पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम शामिल थी।

प्राथमिकी के अनुसार, एसटीएफ के एक जवान ने चार राउंड और तत्कालीन थानाध्यक्ष ने अपनी सर्विस पिस्टल से एक राउंड फायर किया था। पूरे मामले में पुलिस की ओर से दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनकी जांच और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी शाहाबाद के डीआईजी को सौंपी गई है।

वहीं, मृतक की मां आशा देवी ने तत्कालीन जगदीशपुर डीएसपी, तत्कालीन थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाना में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद इस एनकाउंटर को लेकर कई सवाल और चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार किया जाना चाहिए। फिलहाल पूरे मामले पर राज्यभर की नजरें टिकी हुई हैं।

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