गयाजी के खुखरी गांव से रूस के वैश्विक युवा मंच तक पहुंचे शैलेन्द्र कुमार, International Festival of Youth 2026 में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 सितंबर 2026

गयाजी: जिले के ग्रामीण क्षेत्र खुखरी गांव से निकलकर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्ता एवं NSS राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शैलेन्द्र कुमार का रूस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित International Festival of Youth (IFY) 2026 के लिए चयन हुआ है। बहुस्तरीय एवं प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय युवा आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

आयोजकों के अनुसार, IFY 2026 का मुख्य आयोजन रूस के येकातेरिनबर्ग में 11 से 17 सितंबर तक होगा। इसमें 160 से अधिक देशों के युवा प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। शिक्षा, सतत विकास, डिजिटल नवाचार, संस्कृति, युवा नेतृत्व और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर वैश्विक संवाद आयोजन का प्रमुख हिस्सा होंगे। आयोजन रूस सरकार के नेतृत्व में किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।

गांव की पगडंडियों से वैश्विक मंच तक का सफर

शैलेन्द्र कुमार की यह उपलब्धि ग्रामीण परिवेश और वर्षों से जारी सामाजिक सेवा की यात्रा का परिणाम बताई गई है। उनका शुरुआती जीवन गयाजी जिले के खुखरी गांव में बीता। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव के विद्यालय, खुखरी से प्राप्त की। इसके बाद आदर्श मध्य/उच्च विद्यालय, सरबहदा और खुदई से शिक्षा हासिल की। आगे उन्होंने जगजीवन कॉलेज, गयाजी से स्नातक और मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

शैलेन्द्र को सामाजिक सेवा की प्रेरणा परिवार से भी मिली। उनके पिता राजाराम साव लंबे समय से रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की मदद करते रहे हैं और अब तक 20 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। सेवा और जनहित के इसी संस्कार ने शैलेन्द्र को कम उम्र में ही सामाजिक कार्यों से जोड़ने में भूमिका निभाई।

NSS से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची पहचान

छात्र जीवन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़ने के बाद शैलेन्द्र ने साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और कोविड-19 के दौरान जनजागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।

उनकी सामाजिक सेवा और नेतृत्व क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उन्हें NSS राष्ट्रपति पुरस्कार 2020-21 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ। इसके अलावा बिहार राजभवन में भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी किया काम

शैलेन्द्र ने अपने पेशेवर जीवन में शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। फेलोशिप के दौरान उन्होंने हरियाणा के आकांक्षी जिले नूंह के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दो वर्षों तक रहकर प्राथमिक शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, युवा नेतृत्व और महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर काम किया।

वर्तमान में वे बिहार में युवाओं के नेतृत्व विकास, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन से जुड़े जागरूकता अभियानों में सक्रिय हैं।

येकातेरिनबर्ग और सेंट पीटर्सबर्ग में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

IFY 2026 के दौरान शैलेन्द्र कुमार को दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। 11 से 17 सितंबर तक येकातेरिनबर्ग में आयोजित Main Festival में वे विभिन्न देशों से आए युवा प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान वे भारत के ग्रामीण विकास, युवा नेतृत्व और अपने जमीनी सामाजिक कार्यों के अनुभव साझा करेंगे।

इसके बाद 18 से 22 सितंबर तक सेंट पीटर्सबर्ग में Regional Programme में शामिल होंगे। यहां सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वैश्विक युवा संवाद तथा विभिन्न सामाजिक एवं नीतिगत विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान में भाग लेंगे।

उपलब्धि के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी – शैलेन्द्र

अपने चयन पर शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि पिता को निस्वार्थ भाव से रक्तदान करते देखकर उन्होंने सेवा का पहला पाठ सीखा। गांव के स्कूल, मगध विश्वविद्यालय और बिहार तथा हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के अनुभवों ने उन्हें यह सिखाया कि वास्तविक बदलाव जमीनी स्तर पर निरंतर काम करने से आता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत और बिहार का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। रूस से मिलने वाले अनुभव और सीख को वे ग्रामीण युवाओं के विकास एवं सामाजिक बदलाव के कार्यों में लगाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवाओं को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार और रूसी संघ के आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि

खुखरी गांव की पगडंडियों से निकलकर रूस के वैश्विक युवा मंच तक पहुंचना शैलेन्द्र कुमार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया जा रहा है। एक ग्रामीण परिवार से निकलकर उनकी पहली विदेश यात्रा का रूस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना परिवार, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के नागरिकों के लिए खुशी का अवसर है।

लोगों ने शैलेन्द्र के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

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