गया कॉलेज में ‘आजीवन शिक्षा और सतत विकास’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 100 विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 सितंबर 2026
गयाजी: गया कॉलेज, गयाजी के शिक्षा शास्त्र विभाग द्वारा प्रधानाचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र के दिशा-निर्देशन में मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर ‘आजीवन शिक्षा और सतत विकास’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, साक्षरता, सामाजिक सशक्तिकरण और सतत विकास के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
बदलती जरूरतों के अनुरूप आजीवन सीखना जरूरी : डॉ. धनंजय धीरज
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय धीरज के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य और विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। बदलते सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में व्यक्ति को लगातार सीखते हुए स्वयं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा।
विद्यालय और विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है शिक्षा : प्रो. रविकांत
मुख्य वक्ता एवं पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि आजीवन शिक्षा वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। शिक्षा को केवल विद्यालय और विश्वविद्यालय की सीमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। व्यक्ति अपने पूरे जीवन में अनुभव, समाज, कार्यस्थल और विभिन्न परिस्थितियों से निरंतर सीखता रहता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सतत विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने का सशक्त माध्यम है।
महिला और डिजिटल साक्षरता पर दिया जोर
अंग्रेजी विभाग के डॉ. अटल कुमार ने साक्षरता को व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का आधार बताया। उन्होंने महिला साक्षरता, डिजिटल साक्षरता तथा समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करे शिक्षा : डॉ. मार्कंडेय पांडे
डॉ. मार्कंडेय पांडे ने शिक्षा और सतत विकास के बीच संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य जिम्मेदार, संवेदनशील और पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उनका संतुलित उपयोग सतत विकास की मूल अवधारणा है।
साक्षरता सामाजिक समानता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की आधारशिला
भारतीय प्रौढ़ शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. ए.एच. खान ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस समाज में शिक्षा के महत्व और निरक्षरता समाप्त करने की दिशा में अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि साक्षरता सामाजिक समानता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करती है।
उन्होंने युवाओं एवं शिक्षकों से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का आह्वान किया।
तकनीकी बदलाव के दौर में निरंतर सीखना जरूरी : डॉ. राजेश कुमार मिश्रा
डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि आजीवन शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान, कौशल और मूल्यों से लगातार समृद्ध करती है। नई चुनौतियों और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव के दौर में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना बेहद आवश्यक है।
करीब 100 विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र
संगोष्ठी की खास उपलब्धि यह रही कि शिक्षा शास्त्र विभाग के प्रथम वर्ष एवं द्वितीय वर्ष के करीब 100 विद्यार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने आजीवन शिक्षा, साक्षरता, डिजिटल शिक्षा, सामाजिक विकास और सतत विकास जैसे विषयों पर अपने विचार एवं अध्ययन प्रस्तुत किए।
शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी विद्यार्थियों को विभाग की ओर से प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक अमरेंद्र कुमार, निखत परवीन, अजय शर्मा एवं विदुषी कुमारी, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं समसामयिक विषयों पर केंद्रित बताते हुए इसकी सराहना की।
डॉ. मोहम्मद सदरे आलम ने किया समन्वयन
कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. मोहम्मद सदरे आलम ने किया। उन्होंने संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों का संचालन करते हुए वक्ताओं के विचारों को प्रतिभागियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आर.एन. प्रियदर्शनी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह के माध्यम से आजीवन अधिगम, शिक्षा, साक्षरता और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
