विभाजन की विभीषिका को सामूहिक स्मृति में हमेशा अंकित रखना आवश्यक : प्रो. वीनू पंत

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 18 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की ओर से ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत विभाजन के दौरान हुए संघर्षों, बलिदानों और ऐतिहासिक घटनाओं से अवगत कराना था।

विस्थापन और मानवीय पीड़ा का किया जीवंत चित्रण

मुख्य वक्ता सिक्किम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रो. वीनू पंत ने 1947 के विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय पीड़ा का मार्मिक एवं विचारोत्तेजक चित्रण किया। उन्होंने ऐतिहासिक आंकड़ों के साथ-साथ वास्तविक घटनाओं और व्यक्तिगत आत्मकथनों के माध्यम से विभाजन के गहरे मानवीय पक्ष को विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों के सामने रखा।

“स्मरण का उद्देश्य ऐतिहासिक शिकायतों को पालना नहीं”

प्रो. वीनू पंत ने कहा कि विभाजन की विभीषिका और उससे जुड़े आघात को वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों की सामूहिक स्मृति में अंकित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐतिहासिक शिकायतों को पालना नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन की वास्तविक और विनाशकारी कीमत को समझना है।

उन्होंने कहा कि विभाजन एक राजनीतिक निर्णय था। अब अंतहीन बहस के बजाय देश में एकता, राष्ट्रवाद और अखंडता की भावना को मजबूत करने वाले रचनात्मक उपायों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

शिक्षकों ने भी रखे अपने विचार

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) ने बताया कि कार्यक्रम में सामाजिक विज्ञान एवं नीति विद्यापीठ के डीन प्रो. अनिल कुमार सिंह झा तथा ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति अनिल खंडारे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एक अधिक एकजुट भविष्य के निर्माण के लिए अतीत की त्रासदियों को स्वीकार करने और उनसे सीख लेने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रश्न-उत्तर सत्र में छात्रों ने पूछे सवाल

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आनंद गुप्ता के स्वागत भाषण एवं परिचयात्मक वक्तव्य से हुई। इस अवसर पर डॉ. सुधांशु कुमार झा, डॉ. रोहित कुमार और डॉ. अनिल कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे। व्याख्यान के बाद संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विभाजन की सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता से जुड़े कई प्रासंगिक प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समापन डॉ. नीरज कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 18 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की ओर से ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत विभाजन के दौरान हुए संघर्षों, बलिदानों और ऐतिहासिक घटनाओं से अवगत कराना था।

विस्थापन और मानवीय पीड़ा का किया जीवंत चित्रण

मुख्य वक्ता सिक्किम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रो. वीनू पंत ने 1947 के विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय पीड़ा का मार्मिक एवं विचारोत्तेजक चित्रण किया। उन्होंने ऐतिहासिक आंकड़ों के साथ-साथ वास्तविक घटनाओं और व्यक्तिगत आत्मकथनों के माध्यम से विभाजन के गहरे मानवीय पक्ष को विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों के सामने रखा।

“स्मरण का उद्देश्य ऐतिहासिक शिकायतों को पालना नहीं”

प्रो. वीनू पंत ने कहा कि विभाजन की विभीषिका और उससे जुड़े आघात को वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों की सामूहिक स्मृति में अंकित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐतिहासिक शिकायतों को पालना नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन की वास्तविक और विनाशकारी कीमत को समझना है।

उन्होंने कहा कि विभाजन एक राजनीतिक निर्णय था। अब अंतहीन बहस के बजाय देश में एकता, राष्ट्रवाद और अखंडता की भावना को मजबूत करने वाले रचनात्मक उपायों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

शिक्षकों ने भी रखे अपने विचार

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) ने बताया कि कार्यक्रम में सामाजिक विज्ञान एवं नीति विद्यापीठ के डीन प्रो. अनिल कुमार सिंह झा तथा ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति अनिल खंडारे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एक अधिक एकजुट भविष्य के निर्माण के लिए अतीत की त्रासदियों को स्वीकार करने और उनसे सीख लेने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रश्न-उत्तर सत्र में छात्रों ने पूछे सवाल

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आनंद गुप्ता के स्वागत भाषण एवं परिचयात्मक वक्तव्य से हुई। इस अवसर पर डॉ. सुधांशु कुमार झा, डॉ. रोहित कुमार और डॉ. अनिल कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे। व्याख्यान के बाद संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विभाजन की सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता से जुड़े कई प्रासंगिक प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समापन डॉ. नीरज कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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