गयाजी: किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में तीन दिवसीय राखी कार्यशाला का आयोजन बुधवार को उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन प्रमंडल संसाधन सेवी सोनम कुमारी एवं सहायक लेखा पदाधिकारी गुड़िया कुमारी के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर हुई।
सैकड़ों बच्चों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में विभिन्न वर्गों के सैकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए तरह-तरह की आकर्षक राखियां तैयार कीं। इस दौरान बच्चों ने पारंपरिक कला के साथ अपनी कल्पनाशीलता का भी इस्तेमाल किया।
उच्च विद्यालयों के बच्चों की भी सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला में उच्च विद्यालयों के बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय योगदान देते हुए राखी निर्माण की कला सीखी और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया। आयोजकों ने कहा कि बच्चे आगे भी इस तरह की कार्यशालाओं से जुड़कर अपनी रचनात्मक क्षमता को निखार सकते हैं।
रचनात्मकता और संस्कृति से जोड़ना उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता, कला के प्रति रुचि और पारंपरिक संस्कृति के प्रति जुड़ाव को बढ़ावा देना है। तीन दिवसीय कार्यशाला बच्चों के लिए सीखने, सृजन करने और अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर बनी। कार्यशाला को सफल बनाने में प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
गयाजी: किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में तीन दिवसीय राखी कार्यशाला का आयोजन बुधवार को उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन प्रमंडल संसाधन सेवी सोनम कुमारी एवं सहायक लेखा पदाधिकारी गुड़िया कुमारी के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर हुई।
सैकड़ों बच्चों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में विभिन्न वर्गों के सैकड़ों बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए तरह-तरह की आकर्षक राखियां तैयार कीं। इस दौरान बच्चों ने पारंपरिक कला के साथ अपनी कल्पनाशीलता का भी इस्तेमाल किया।
उच्च विद्यालयों के बच्चों की भी सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला में उच्च विद्यालयों के बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय योगदान देते हुए राखी निर्माण की कला सीखी और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया। आयोजकों ने कहा कि बच्चे आगे भी इस तरह की कार्यशालाओं से जुड़कर अपनी रचनात्मक क्षमता को निखार सकते हैं।
रचनात्मकता और संस्कृति से जोड़ना उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता, कला के प्रति रुचि और पारंपरिक संस्कृति के प्रति जुड़ाव को बढ़ावा देना है। तीन दिवसीय कार्यशाला बच्चों के लिए सीखने, सृजन करने और अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर बनी। कार्यशाला को सफल बनाने में प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।