फर्जी लोन के जरिए करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा, बैंक के दो अधिकारियों समेत 28 लोगों पर एफआईआर
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 जून 2026,
गयाजी: शहर में स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की जीबी रोड शाखा में करीब 3 करोड़ 80 लाख रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित शाखा में हुए इस वित्तीय घोटाले को लेकर बैंक के दो तत्कालीन प्रबंधकों समेत कुल 28 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
बैंक अधिकारियों और जालसाजों की मिलीभगत की आशंका
जानकारी के अनुसार, यह करोड़ों रुपये का फ्रॉड जालसाजों और बैंक के दो मैनेजर स्तर के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अंजाम दिया गया। मामले में बैंक के सहायक प्रबंधक कुमार दीपेश ने सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्राथमिकी में दो सेवारत बैंक अधिकारियों सहित कुल 28 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
इंटरनल ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का राज
घोटाले का खुलासा उस समय हुआ जब बैंक की केंद्रीय टीम ने इंटरनल ऑडिट के दौरान कुछ संदिग्ध लोन खातों का सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि लोन फाइलों में दर्ज वाहनों के इंजन नंबर, चेसिस नंबर और स्वामित्व संबंधी विवरण पूरी तरह फर्जी थे। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन स्वीकृत कर बड़ी रकम का गबन किया गया।
ऑडिट टीम की रिपोर्ट में इस पूरे मामले को मानवीय भूल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश बताया गया है।
मोटे कमीशन के लालच में नियमों की अनदेखी
प्राथमिकी के अनुसार, नामजद बैंक अधिकारियों में सेल्स डिवीजन के रिलेशनशिप मैनेजर वारिस आजम और टीम सेल्स मैनेजर रोहित राज शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि मोटे कमीशन के लालच में इन अधिकारियों ने फर्जी लोन फाइलों को आगे बढ़ाया और बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए ऋण स्वीकृत किए।
पुलिस कर रही है मामले की गहन जांच
सिटी एसपी अभिनव ने बताया कि सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज कर विभिन्न पहलुओं से इसकी गहन जांच की जा रही है। शुरुआती स्तर पर बैंक के रिकॉर्ड खंगाले गए हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सिटी एसपी ने कहा कि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
करीब 3.80 करोड़ रुपये की इस धोखाधड़ी ने बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक निगरानी और ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और बैंक की आंतरिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
