सीयूएसबी में ‘नशा मुक्त भारत’ विषय पर वेबिनार आयोजित, रोकथाम, पुनर्वास और विधिक सहायता पर हुई चर्चा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 26 जून 2026,
गयाजी: अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के विधि एवं शासन अध्ययन संकाय की विधिक सहायता क्लिनिक द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), गया के सहयोग से “नशा मुक्त भारत : रोकथाम, पुनर्वास एवं विधिक सहायता परिप्रेक्ष्य” विषय पर ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया।
कुलपति के संरक्षण और विधि संकाय के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण तथा विधि एवं शासन अध्ययन संकाय के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. अशोक कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विधिक सहायता क्लिनिक के संकाय समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने किया। इसके सफल संचालन में संकाय सह-समन्वयक डॉ. अनंत प्रकाश नारायण एवं डॉ. चंदना सुबा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
नालसा की जागरूकता वीडियो से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के डीएडब्ल्यूएन कैंपेन की आधिकारिक जागरूकता वीडियो के प्रदर्शन से हुई। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं पारिवारिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा नशामुक्त जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
युवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन रहा नशा : डॉ. सुरेन्द्र कुमार
अपने संबोधन में डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि मादक पदार्थों का बढ़ता प्रचलन समाज, विशेषकर युवाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता, समय पर परामर्श, सामुदायिक सहभागिता और प्रभावी विधिक सहायता के माध्यम से ही नशा मुक्त समाज की स्थापना संभव है।
उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए नशा उन्मूलन अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने तथा समाज के कमजोर और प्रभावित वर्गों तक निःशुल्क विधिक सहायता एवं जागरूकता का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
नशा प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान मादक द्रव्य एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के प्रमुख प्रावधानों, नशा नियंत्रण से संबंधित कानूनी व्यवस्थाओं, पुनर्वास की उपलब्ध सुविधाओं तथा नशा प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिभागियों को नशे के दुष्प्रभावों, उससे बचाव के उपायों तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के विभिन्न माध्यमों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
नशा मुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर “स्वच्छ मन, स्वच्छ विचार — नशा मुक्त भारत हमारा संकल्प” का संदेश देते हुए सभी प्रतिभागियों से नशा मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं संचालन में विधिक सहायता क्लिनिक के छात्र-छात्राओं रिफ़ात, तनीषा, पुष्पित, अनुज किशोर, छवि, आर्या, विनेदिता एवं श्रेया की सक्रिय एवं सराहनीय भूमिका रही।
