गया केंद्रीय कारा के उपाधीक्षक निलंबित, बंदियों से मिलीभगत और प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने के आरोप

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 26 जून 2026,

गयाजी: गया केंद्रीय कारा में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जेल उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर बंदियों के साथ कथित मिलीभगत, जेल नियमों की अनदेखी तथा प्रतिबंधित सामग्री को बिना जांच जेल के अंदर पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह पर आरोप है कि वे बंदियों के परिजनों से पैसे लेकर उनके द्वारा लाई गई सामग्री को बिना किसी सुरक्षा जांच के जेल परिसर में पहुंचाने की अनुमति देते थे। इतना ही नहीं, यदि कोई जेलकर्मी या पुलिसकर्मी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताता था, तो उसे फटकार लगाई जाती थी। इन आरोपों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला तब उजागर हुआ जब एक बंदी का परिजन प्रतिबंधित सामग्री के साथ जेल में प्रवेश करने का प्रयास करते हुए पकड़ा गया। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जेल अधीक्षक ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया, लेकिन आरोप है कि उपाधीक्षक ने एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया।

इसके बाद जेल अधीक्षक ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी। रिपोर्ट मिलने के बाद जेल महानिरीक्षक के स्तर पर प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर पाए गए। इसके आधार पर उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया है।

जेल प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या पूर्व में भी प्रतिबंधित सामग्री जेल के अंदर पहुंचाई जाती रही है और इस पूरे नेटवर्क में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की कोई भूमिका रही है या नहीं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला बिहार की जेल सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह एक व्यक्तिगत स्तर की अनियमितता थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

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