जर्जर छत ने फिर खोली सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल

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07 सितंबर 2025 को आर्यावर्त वाणी ने उठाया था मामला, आज फिर भरभराकर गिरने लगी स्कूल की छत; बाल-बाल बचे बच्चे

आर्यावर्त वाणी | जहानाबाद/हुलासगंज |12 अगस्त 2026,

जहानाबाद: हुलासगंज प्रखंड के सलेमपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब विद्यालय की जर्जर छत अचानक भरभराकर गिरने लगी। घटना के समय कुछ बच्चे विद्यालय के अंदर बैठे थे, जबकि कुछ बच्चे बाहर बैठकर खाना खा रहे थे। छत का हिस्सा गिरते ही बच्चों में दहशत फैल गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे।

गनीमत रही कि इस घटना में किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन जिस तरह से विद्यालय की छत ने अचानक जवाब दिया, उससे यह साफ है कि अगर उस वक्त बच्चे छत के नीचे होते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

बेंच पर बिखरा मलवा

07 सितंबर 2025 को आर्यावर्त वाणी ने उठाया था मुद्दा

सलेमपुर प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन की स्थिति कोई नई बात नहीं थी। आर्यावर्त वाणी ने 07 सितंबर 2025 को प्रकाशित अपनी खबर में इस विद्यालय के भवन का जिक्र करते हुए खबर का शीर्षक दिया था— “सलेमपुर प्राथमिक विद्यालय जर्जर भवन में संचालित, मासूम बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे”।

उस समय भी विद्यालय भवन की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले का संज्ञान लिया गया और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इसके बाद विद्यालय में मरम्मत का कुछ काम कराया गया और भवन पर पेंट भी किया गया। बाहर से देखने पर विद्यालय की स्थिति पहले से बेहतर नजर आने लगी, लेकिन भवन की अंदरूनी मजबूती को लेकर समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

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प्रधान शिक्षिका ने बताई मरम्मत की पूरी कहानी

घटना के संबंध में जब विद्यालय की प्रधान शिक्षिका से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि भवन की खराब स्थिति को लेकर उनके स्तर से पहले ही शिकायत की गई थी। प्रधान शिक्षिका के अनुसार, उन्हें विद्यालय के रखरखाव के लिए जारी 25 हजार रुपये की राशि से ही मरम्मत कराने को कहा गया था।

उन्होंने बताया कि उस समय कनीय अभियंता द्वारा भवन की मरम्मत में करीब 55 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था। प्रधान शिक्षिका के मुताबिक, अलग से कोई मद जारी नहीं होने के कारण तत्काल उपलब्ध संसाधनों से करीब 10-15 हजार रुपये खर्च कर भवन को दुरुस्त कराया गया था।

प्रधान शिक्षिका ने यह भी बताया कि विद्यालय के रखरखाव मद में अभी भी उनके पास करीब 10-12 हजार रुपये की राशि शेष है।

छत से उखड़ा प्लास्टर

मरम्मत के बावजूद क्यों नहीं बच सकी छत?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन की जर्जर स्थिति पहले से सामने थी और मरम्मत की जरूरत भी बताई गई थी, तो आखिर ऐसी कौन-सी मरम्मत हुई कि कुछ समय बाद ही छत फिर से कमजोर होकर गिरने लगी?

अगर कनीय अभियंता द्वारा मरम्मत के लिए करीब 55 हजार रुपये का अनुमान बताया गया था, तो क्या उपलब्ध राशि से कराई गई मरम्मत पर्याप्त थी? क्या विद्यालय भवन की तकनीकी जांच दोबारा कराई गई? क्या केवल मरम्मत और पेंट से भवन को सुरक्षित मान लिया गया?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब संबंधित विभाग और प्रशासन को देना होगा।

बच्चों को लेकर चिंतित हुए अभिभावक

छत गिरने की घटना के बाद ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई। सूचना मिलते ही कई अभिभावक दौड़े-दौड़े विद्यालय पहुंचे और अपने बच्चों को अपने साथ घर ले गए। कुछ बच्चे घटना से इतने डर गए कि उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया और विद्यालय परिसर से बाहर निकल गए।

घटना की सूचना मिलने के बाद हुलासगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और विद्यालय की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जल्द आवश्यक कार्रवाई करते हुए विद्यालय को दुरुस्त कराने का भरोसा दिया।

“हम लोग अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर स्कूल की छत ही सुरक्षित नहीं है तो अभिभावक कैसे निश्चिंत रहें? आज घटना के बाद हम लोग डर गए और अपने बच्चों को स्कूल से घर ले आए। प्रशासन को पूरे भवन की जांच कराकर स्थायी समाधान करना चाहिए।”

शिवचरण मांझी, ग्रामीण

“आज जब स्कूल की छत गिरने लगी तो बच्चों में अचानक भगदड़ जैसी स्थिति हो गई। कुछ बच्चे अंदर बैठे थे और कुछ बाहर खाना खा रहे थे। भगवान का शुक्र है कि किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं लगी। अगर छत का हिस्सा बच्चों के ऊपर गिर जाता तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था।”

विकास कुमार, ग्रामीण

हादसा टला, लेकिन सवाल अब भी कायम

इस घटना में किसी बच्चे की जान नहीं गई और कोई गंभीर रूप से घायल भी नहीं हुआ, यह निश्चित रूप से राहत की बात है। लेकिन यह घटना सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करती है।

सवाल यह है कि जब एक साल पहले ही विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति की तस्वीर सामने आ गई थी, शिकायत भी की गई थी और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी हुई थी, तो फिर भवन की वास्तविक मजबूती सुनिश्चित क्यों नहीं की जा सकी?

बच्चे विद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं, किसी खतरे का सामना करने के लिए नहीं। इसलिए अब जरूरत सिर्फ छत की मरम्मत कराने की नहीं, बल्कि पूरे भवन की तकनीकी जांच कराकर उसकी संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने की है, ताकि अगली बार “बाल-बाल बचने” की खबर के बजाय किसी बड़े हादसे की खबर न लिखनी पड़े।

“इस प्रकार की घटना से हमलोग स्तब्ध है। हम बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। इसलिए हमने अभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी और प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी से बात कर तत्काल स्कूल को वित्त रहित हाई स्कूल बनवरिया में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है ताकि बच्चों के पठन पाठन का कार्य सुचारू रूप से संचालित होता रहे।”

राकेश पाण्डेय, वार्ड सदस्य

“इस प्रकार की घटना से प्रशासन और सरकार की साफ लापरवाही झलकती है। पिछले साल डीएम अलंकृता पांडे ने स्कूल के निरीक्षण के क्रम में कहा था कि इस स्कूल को तोड़कर दुबारा बनाया जाए क्योंकि अब ये स्कूल बिल्कुल जर्जर हो चुका है। इसका dpr भी बनकर तैयार है कहा गया था कि चुनाव के बाद इसपर काम लगा दिया जाएगा पर सरकार की लापरवाही के कारण आज ये स्थिति बन गई है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। जिसका ताजा परिणाम आज की घटना है।”

संजीव कुमार, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि

जमीन पर बिखरा मलवा

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