नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में लापरवाही, पंचानपुर थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिस पदाधिकारी निलंबित

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 11 अगस्त 2026

गयाजी: जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने एक बार फिर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचानपुर थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। जिले के पंचानपुर थाना से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में कर्तव्य के निर्वहन में प्रथमदृष्टया लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता पाए जाने के कारण यह कदम उठाया गया। इसके साथ आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश भी दिया है।

निलंबित पुलिस पदाधिकारियों में पु०अ०नि०-सह-थानाध्यक्ष पद्माकर उपाध्याय, प्रभारी थानाध्यक्ष पु०अ०नि० नगिना उराँव और पु०स०अ०नि० संतोष कुमार, तीनों पंचानपुर थाना, गयाजी शामिल हैं। निलंबन अवधि में तीनों का मुख्यालय पुलिस केंद्र, गयाजी निर्धारित किया गया है।

नाबालिग के लापता होने के बाद सामने आया मामला

पुलिस कार्यालय में 10 अगस्त को एक महिला द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, उनकी नाबालिग पुत्री 6 अगस्त को दोपहर करीब 2:45 बजे घर से बाजार जाने के लिए निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने काफी खोजबीन की। इसके बाद 7 अगस्त को पंचानपुर थाना में लिखित आवेदन दिया गया।

आवेदन के अनुसार, उसी दिन करीब 11:45 बजे नाबालिग अचानक रोते हुए घर पहुंची। परिजनों द्वारा पूछताछ करने पर उसने पंचानपुर गांव निवासी नीरज कुमार, पिता रामप्रवेश गोस्वामी पर उसे डराने-धमकाने एवं बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने तथा उसके साथ जबरदस्ती करने का आरोप लगाया।

परिजनों ने इसके बाद पंचानपुर थाना पहुंचकर नामजद प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया।

आरोपी को थाना लाने और छोड़ने में भी प्रक्रिया पर उठे सवाल

पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया गया कि 8 अगस्त को दोपहर करीब 3:15 बजे नीरज कुमार को पंचानपुर बाजार स्थित दुकान से उठाकर थाना लाया गया, लेकिन अगले दिन 9 अगस्त को उसे कथित रूप से पैसे लेकर छोड़ दिया गया।

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस निरीक्षक को जांच एवं विधि-सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

थाना दैनिकी में नहीं मिली आरोपी को लाने-छोड़ने की प्रविष्टि

उपलब्ध जांच प्रतिवेदन एवं अभिलेखों की समीक्षा में प्रथमदृष्टया सामने आया कि गंभीर आरोपों की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस महानिरीक्षक के हस्तक्षेप से पहले न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही अपेक्षित विधिसम्मत कार्रवाई की गई।

जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित व्यक्ति को 8 अगस्त को बिना प्राथमिकी दर्ज किए थाना लाया गया था। हालांकि, उसे थाना लाए जाने अथवा बाद में छोड़े जाने से संबंधित थाना दैनिकी में कोई प्रविष्टि नहीं की गई थी।

जांच सामग्री के आधार पर प्रथमदृष्टया यह भी सामने आया कि संबंधित व्यक्ति को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना और वरीय पदाधिकारी को समुचित सूचना दिए बिना रातभर थाना में रखने के बाद मुक्त कर दिया गया।

तीनों पुलिस पदाधिकारी निलंबित

उपलब्ध तथ्यों एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथमदृष्टया गंभीर कदाचार पाए जाने के बाद पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र द्वारा तीनों पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें सामान्य जीवन-यापन भत्ता देय होगा और मुख्यालय पुलिस केंद्र, गयाजी निर्धारित किया गया है।

इसके साथ ही तीनों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करने का आदेश भी दिया गया है।

गंभीर मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र ने स्पष्ट किया है कि बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक विलंब, विधिक प्रक्रिया की अनदेखी अथवा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा, त्वरित विधिसम्मत कार्रवाई, निष्पक्ष अनुसंधान और न्याय सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, गयाजी को सभी आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई तत्काल एवं निष्पक्ष रूप से सुनिश्चित कराने तथा अनुसंधान का प्रभावी पर्यवेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा थाना पहुंचकर मामले की समीक्षा एवं पर्यवेक्षण किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को न्याय दिलाने में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित पुलिस पदाधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

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