पितृपक्ष मेला को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठक, सेवा शिविरों की व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 19 अगस्त 2026
गयाजी: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला-2026 को व्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में अपर समाहर्ता, राजस्व परितोष कुमार की अध्यक्षता में जिले में सक्रिय विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पितृपक्ष मेला के दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए जाने वाले निःशुल्क सेवा शिविरों, तीर्थयात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और शिविरों के संचालन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
सेवा भावना और अतिथि सत्कार के साथ कार्य करने की अपील
अपर समाहर्ता ने कहा कि पितृपक्ष मेला गयाजी जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री गयाजी पहुंचते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं सेवा भाव से जुड़े लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मेला अवधि में पूरी सेवा भावना, आत्मीयता एवं जिम्मेदारी के साथ तीर्थयात्रियों और अतिथियों का स्वागत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं एवं सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे गया से सुखद अनुभव लेकर लौटें।
सेवा शिविरों में स्वच्छता और हाइजीन पर विशेष जोर
बैठक में स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए जाने वाले निःशुल्क सेवा शिविरों की व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। अपर समाहर्ता ने प्रत्येक शिविर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शिविर परिसर में नियमित कूड़ा उठाव एवं सफाई कराने तथा गंदगी जमा नहीं होने देने को कहा गया।
उन्होंने विशेष रूप से भोजन वितरण करने वाले शिविरों में भोजन की गुणवत्ता एवं शुद्धता का ध्यान रखने का निर्देश दिया। भोजन तैयार करने और परोसने के दौरान स्वच्छता एवं हाइजीन के मानकों का पालन करने तथा किसी भी परिस्थिति में बासी या खराब भोजन श्रद्धालुओं को नहीं परोसने को कहा गया।
स्वच्छ पानी का उपयोग, खाद्य सामग्री का उचित रख-रखाव, भोजन बनाने एवं परोसने वाले कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत स्वच्छता और नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। भोजन वितरण के दौरान भीड़ प्रबंधन एवं अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
सेवा से बनेगी गयाजी की सकारात्मक पहचान
अपर समाहर्ता ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाओं के सेवा कार्य केवल श्रद्धालुओं की सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे गयाजी की छवि भी देश-विदेश में बनती है। अलग-अलग राज्यों एवं देशों से आने वाले तीर्थयात्री यहां की व्यवस्था, स्थानीय लोगों के व्यवहार और सेवा भावना को अपने अनुभव के रूप में लेकर जाते हैं।
उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से की जाने वाली सेवा गयाजी की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ यहां की मानवीय संवेदनशीलता एवं अतिथि सत्कार की परंपरा को भी मजबूत करती है। संस्थाओं से श्रद्धालुओं के साथ विनम्र एवं सहयोगात्मक व्यवहार रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था अथवा असुविधा की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देने की अपील की गई।
मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं पर भी चल रहा काम
अपर समाहर्ता ने बताया कि पितृपक्ष मेला को आकर्षक, व्यवस्थित एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा, घाटों एवं वेदी स्थलों की व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की तैयारियों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं का सक्रिय सहयोग मिलने से मेला को और बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सकेगा।
प्रशासन और संस्थाओं के बीच समन्वय पर जोर
स्वयंसेवी संस्थाओं को अपने-अपने सेवा शिविरों में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की पूर्व योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया। शिविरों में पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की उपलब्धता, भोजन एवं पेयजल, स्वच्छता, प्राथमिक आवश्यकताओं तथा श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
अपर समाहर्ता ने संस्थाओं से जिला प्रशासन के संबंधित पदाधिकारियों एवं मेला कोषांग के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की अपील की। किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल संबंधित पदाधिकारी को सूचना देने को कहा गया, ताकि उसका त्वरित समाधान किया जा सके।
बढ़-चढ़कर सहभागिता की अपील
अपर समाहर्ता, राजस्व ने जिले की सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं सेवा भाव से जुड़े लोगों से पितृपक्ष मेला-2026 में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की व्यवस्था और स्वयंसेवी संस्थाओं की सेवा भावना के सामूहिक प्रयास से पितृपक्ष मेला को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ, सुरक्षित एवं यादगार बनाया जा सकता है।
बैठक में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव एवं आवश्यकताओं से अपर समाहर्ता को अवगत कराया तथा पितृपक्ष मेला के सफल आयोजन में जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अपर समाहर्ता ने कहा कि पितृपक्ष मेला गयाजी जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री गयाजी पहुंचते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं सेवा भाव से जुड़े लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मेला अवधि में पूरी सेवा भावना, आत्मीयता एवं जिम्मेदारी के साथ तीर्थयात्रियों और अतिथियों का स्वागत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं एवं सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे गया से सुखद अनुभव लेकर लौटें।
सेवा शिविरों में स्वच्छता और हाइजीन पर विशेष जोर
बैठक में स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए जाने वाले निःशुल्क सेवा शिविरों की व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। अपर समाहर्ता ने प्रत्येक शिविर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शिविर परिसर में नियमित कूड़ा उठाव एवं सफाई कराने तथा गंदगी जमा नहीं होने देने को कहा गया।
उन्होंने विशेष रूप से भोजन वितरण करने वाले शिविरों में भोजन की गुणवत्ता एवं शुद्धता का ध्यान रखने का निर्देश दिया। भोजन तैयार करने और परोसने के दौरान स्वच्छता एवं हाइजीन के मानकों का पालन करने तथा किसी भी परिस्थिति में बासी या खराब भोजन श्रद्धालुओं को नहीं परोसने को कहा गया।
स्वच्छ पानी का उपयोग, खाद्य सामग्री का उचित रख-रखाव, भोजन बनाने एवं परोसने वाले कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत स्वच्छता और नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। भोजन वितरण के दौरान भीड़ प्रबंधन एवं अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
सेवा से बनेगी गयाजी की सकारात्मक पहचान
अपर समाहर्ता ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाओं के सेवा कार्य केवल श्रद्धालुओं की सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे गयाजी की छवि भी देश-विदेश में बनती है। अलग-अलग राज्यों एवं देशों से आने वाले तीर्थयात्री यहां की व्यवस्था, स्थानीय लोगों के व्यवहार और सेवा भावना को अपने अनुभव के रूप में लेकर जाते हैं।
उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से की जाने वाली सेवा गयाजी की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ यहां की मानवीय संवेदनशीलता एवं अतिथि सत्कार की परंपरा को भी मजबूत करती है। संस्थाओं से श्रद्धालुओं के साथ विनम्र एवं सहयोगात्मक व्यवहार रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था अथवा असुविधा की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देने की अपील की गई।
मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं पर भी चल रहा काम
अपर समाहर्ता ने बताया कि पितृपक्ष मेला को आकर्षक, व्यवस्थित एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा, घाटों एवं वेदी स्थलों की व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की तैयारियों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं का सक्रिय सहयोग मिलने से मेला को और बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सकेगा।
प्रशासन और संस्थाओं के बीच समन्वय पर जोर
स्वयंसेवी संस्थाओं को अपने-अपने सेवा शिविरों में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की पूर्व योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया। शिविरों में पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की उपलब्धता, भोजन एवं पेयजल, स्वच्छता, प्राथमिक आवश्यकताओं तथा श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
अपर समाहर्ता ने संस्थाओं से जिला प्रशासन के संबंधित पदाधिकारियों एवं मेला कोषांग के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की अपील की। किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल संबंधित पदाधिकारी को सूचना देने को कहा गया, ताकि उसका त्वरित समाधान किया जा सके।
बढ़-चढ़कर सहभागिता की अपील
अपर समाहर्ता, राजस्व ने जिले की सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं सेवा भाव से जुड़े लोगों से पितृपक्ष मेला-2026 में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की व्यवस्था और स्वयंसेवी संस्थाओं की सेवा भावना के सामूहिक प्रयास से पितृपक्ष मेला को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ, सुरक्षित एवं यादगार बनाया जा सकता है।
बैठक में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव एवं आवश्यकताओं से अपर समाहर्ता को अवगत कराया तथा पितृपक्ष मेला के सफल आयोजन में जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
