सीयूएसबी के गुरु दक्षता कार्यक्रम में ‘शैक्षणिक नेतृत्व एवं सुशासन’ पर दिया गया व्याख्यान
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 29 जून 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा आयोजित 24 दिवसीय आवासीय ‘गुरु दक्षता कार्यक्रम’ (फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम) में प्रो. विनीता सहाय, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान बोधगया ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है और बिहार प्रतिभाशाली एवं सक्षम मानव संसाधनों से समृद्ध है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास पर दिया जोर
प्रो. सहाय ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही सतत सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने ‘शैक्षणिक नेतृत्व एवं सुशासन’ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को उत्कृष्ट बनाने के लिए दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावी सुशासन, नवाचार, रणनीतिक योजना और सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
आत्मनिर्भरता और सहयोग की संस्कृति पर बल
प्रो. सहाय ने स्टीफन आर. कोवी द्वारा प्रतिपादित निर्भरता, आत्मनिर्भरता और पारस्परिक निर्भरता की अवधारणाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि प्रभावी नेतृत्व व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास की सतत यात्रा है। व्यक्ति को आत्म-अनुशासन, उत्तरदायित्व और दक्षता विकसित कर निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफल शैक्षणिक नेतृत्व सहयोग, सामूहिक उत्तरदायित्व, नवाचार और सतत अधिगम की संस्कृति विकसित करता है, जो किसी भी संस्थान की उत्कृष्टता के लिए अनिवार्य है।
पंचकोश सिद्धांत और भावनात्मक विकास पर व्याख्यान
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रो. अजय कुमार सिंह, पूर्व कुलपति, श्री श्री विश्वविद्यालय और पूर्व विभागाध्यक्ष, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने ‘व्यक्तिगत-भावनात्मक विकास एवं परामर्श’ विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के पंचकोश सिद्धांत की व्याख्या करते हुए अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए इन सभी आयामों का संतुलित विकास आवश्यक है।
तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
प्रो. सिंह ने योग आधारित मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के संदर्भ में सुदर्शन क्रिया और “द हैप्पीनेस प्रोग्राम” के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने इसे तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और समग्र कल्याण के लिए उपयोगी बताया।
बिहार और झारखंड के 42 शिक्षक ले रहे हैं प्रशिक्षण
सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि 24 दिवसीय आवासीय गुरु दक्षता कार्यक्रम एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. तरुण कुमार त्यागी, कृषि विभाग के डॉ. हेमंत कुमार सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के आतिश दाश और शिक्षक शिक्षा विभाग की लेफ्टिनेंट डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के समन्वित प्रयासों से संचालित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में बिहार और झारखंड के 10 विश्वविद्यालयों से आए 42 नवनियुक्त शिक्षक भाग ले रहे हैं।
