खिजरसराय के कुड़वा में हाई मास्ट लाइट पर विवाद: स्थान चयन पर ग्रामीण बनाम जनप्रतिनिधि
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 मई 2026,
गयाजी: जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत कुड़वा बाज़ार में हाई मास्ट लाइट की स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। यह मामला अब केवल एक सार्वजनिक सुविधा के इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और सामुदायिक जरूरतों के संतुलन का उदाहरण बनता दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला?
खिजरसराय क्षेत्र संख्या 9 के जिला परिषद सदस्य कुंदन कुमार द्वारा अनुशंसित हाई मास्ट लाइट मूल रूप से कुड़वा मछली बाजार चौक के पास लगाए जाने के लिए निर्धारित थी। यह स्थान बाजार का केंद्रीय बिंदु माना जाता है, जहां से कई प्रमुख रास्ते निकलते हैं।
हालांकि, वर्तमान में लाइट को उस निर्धारित स्थान से हटाकर कब्रिस्तान की घेराबंदी के पास, ट्रांसफार्मर के समीप स्थापित किया जा रहा है। इसी बदलाव ने ग्रामीणों के एक वर्ग में नाराजगी को जन्म दिया है।

ग्रामीणों की आपत्ति: सुरक्षा और उपयोगिता पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का तर्क है कि हाई मास्ट लाइट का मुख्य उद्देश्य अधिकतम क्षेत्र को रोशन करना होता है, जो आमतौर पर चौक या केंद्र बिंदु पर लगाने से ही संभव होता है।
🔹सूर्यदेव नारायण का कहना है कि अगर लाइट चौक से हटकर लगाई जाएगी, तो आधा इलाका अंधेरे में रहेगा, जिससे असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
🔹विवेक ने बैंक के आगे और पीछे के हिस्से में असमान रोशनी की समस्या की ओर इशारा किया।
🔹 अनिरुद्ध यादव ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक संसाधन का उपयोग तय स्थान पर ही होना चाहिए ताकि सभी को समान लाभ मिल सके।
🔹अजय ने चौक क्षेत्र को संवेदनशील बताते हुए कहा कि हाल के दिनों में यहां चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं और अवैध शराब कारोबार भी इसी मार्ग से संचालित होता है।
विशेष रूप से, यह चौक खालिस रोड, ज़ारू अगड़ीपार और बनवरिया जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
जनप्रतिनिधि का पक्ष: “स्थान उपयुक्त, शिकायत स्वाभाविक”
जिला परिषद सदस्य कुंदन कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें शिकायत मिली थी, जिसके बाद उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण किया। उनके अनुसार:
🔹चयनित स्थान तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण से उचित है
हाई मास्ट लाइट की क्षमता इतनी होती है कि वह दूर तक प्रकाश फैला सकती है
🔹बैंक परिसर और आसपास का क्षेत्र इससे सुरक्षित रहेगा
🔹जनमत विभाजित होना स्वाभाविक है—“20 लोग विरोध करेंगे तो 30 समर्थन भी करेंगे”
उन्होंने यह भी बताया कि अब लाइट का फाउंडेशन तैयार हो चुका है, जिससे स्थान परिवर्तन की संभावना कम है।
पंचायत के मुखिया ने रुकवाया काम
वही इस पूरे मामले में कुड़वा पंचायत के मुखिया राजबल्लम पासवान के द्वारा प्रतिक्रिया देते हुए लाइट लगाने के काम को अस्थाई तौर पर रुकवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी खास को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ये काम किया जा रहा है। लाइट के यहां लगने से सिर्फ कब्रिस्तान और आस पास के क्षेत्रों में ही रौशनी होगी और चौक क्षेत्र का लगभग भाग अंधेरे में ही रहेगा। उन्होंने बताया कि इस बाबत पूरी जानकारी जिला परिषद अध्यक्ष को भी दे दी गई है।
कहां है समस्या की जड़?
यह विवाद मुख्य रूप से साइट सिलेक्शन (स्थान चयन) की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी की कमी को दर्शाता है।
1. प्री-इंस्टॉलेशन सर्वे की कमी
यदि प्रारंभिक चरण में तकनीकी सर्वे के साथ-साथ स्थानीय फीडबैक लिया गया होता, तो यह विवाद टल सकता था।
2. सामुदायिक आवश्यकता बनाम प्रशासनिक निर्णय
ग्रामीणों का फोकस सुरक्षा और समान रोशनी पर है, जबकि जनप्रतिनिधि तकनीकी क्षमता और व्यवहारिकता की बात कर रहे हैं।
3. संवेदनशील क्षेत्र में असमान रोशनी का खतरा
अपराध-प्रवण क्षेत्रों में “डार्क स्पॉट” (अंधेरे क्षेत्र) सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। ऐसे में लाइट की पोजिशनिंग बेहद अहम हो जाती है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
🔹इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका अपेक्षित थी।
🔹क्या साइट का तकनीकी आकलन हुआ?
🔹क्या पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से इनपुट लिया गया?
🔹क्या ग्रामसभा या स्थानीय निकाय से सहमति ली गई?
इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।
आगे क्या?
अब यह मामला पूरी तरह परिणाम पर निर्भर करता है।
जब हाई मास्ट लाइट पूरी तरह कार्यशील होगी, तब यह स्पष्ट होगा कि:
🔹क्या यह वास्तव में व्यापक क्षेत्र को रोशन कर पाती है?
🔹क्या ग्रामीणों की आशंकाएं सही साबित होती हैं?
🔹या फिर जनप्रतिनिधि का निर्णय व्यवहारिक रूप से सही साबित होता है?
कुड़वा बाज़ार का यह विवाद स्थानीय विकास परियोजनाओं में “प्लानिंग बनाम ग्राउंड रियलिटी” के टकराव को उजागर करता है।
यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय होता, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह हाई मास्ट लाइट—विवाद की वजह बनेगी या समाधान की।

