महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न करना महिला थाना प्रभारी को पड़ा भारी, आईजी ने किया सस्पेंड

0
Screenshot_2026_0701_230312.jpg
Share with

आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 01 जुलाई 2026,

गयाजी: गयाजी महिला थाना की प्रभारी पु.अ.नि. खुशबु कुमारी को महिला उत्पीड़न के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने तथा वरिष्ठ अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मगध क्षेत्र विकास वैभव ने उन्हें सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, गयाजी निर्धारित किया है।

महिला ने आईजी से लगाई थी न्याय की गुहार

मामला मनीषा कुमारी, निवासी केपी रोड, कोतवाली थाना, गयाजी से जुड़ा है। उन्होंने 22 जून 2026 को पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र के कार्यालय में आवेदन देकर आरोप लगाया कि महिला थाना प्रभारी उनके आवेदन पर एफआईआर दर्ज करने से लगातार इंकार कर रही हैं।

पीड़िता का आरोप था कि ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार कर घर से निकाल दिया। इसके बावजूद महिला थाना में कई बार आवेदन देने और अनुरोध करने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

एसपी और आईजी के निर्देश के बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर

रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता ने 21 अप्रैल 2026 को महिला थाना में आवेदन दिया था। बाद में 4 मई 2026 को अपने पिता के साथ नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) से मिलकर भी कार्रवाई की मांग की। इसके बावजूद महिला थाना प्रभारी ने उन्हें जमशेदपुर में मामला दर्ज कराने की सलाह दी।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

22 जून 2026 को पीड़िता ने आईजी मगध से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। इसके बाद आईजी ने महिला थाना प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि गया महिला थाना में ही प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जाए, क्योंकि पीड़िता ने गयाजी में रहकर ही अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया पूरी कराने की इच्छा जताई थी तथा जमशेदपुर जाने में असमर्थता व्यक्त की थी।

निर्देश के बावजूद दर्ज की गई सिर्फ जीरो एफआईआर

आईजी कार्यालय के अनुसार, स्पष्ट निर्देशों के बावजूद महिला थाना प्रभारी ने गयाजी में नियमित एफआईआर दर्ज करने के बजाय पीड़िता से नया आवेदन लिखवाकर जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की और उसे मानगो थाना, जमशेदपुर भेज दिया।

पुलिस महानिरीक्षक ने इसे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना तथा कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया गया उल्लेख

कार्रवाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ‘रूपाली देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ सहित अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया गया है। इन फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि वैवाहिक प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों में पीड़िता जहां शरण लेती है या जहां उसके लिए सुविधाजनक हो, वहां भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों को Continuing Offence माना जाता है।

आईजी ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में मगध क्षेत्र के सभी पुलिस अधीक्षकों और थानाध्यक्षों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि एफआईआर दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी, विशेषकर महिला उत्पीड़न के मामलों में।

आदेश उल्लंघन और मनमाने रवैये पर निलंबन

जांच में यह पाया गया कि महिला थाना प्रभारी ने न केवल समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की, बल्कि नगर पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक के स्पष्ट निर्देशों का भी पालन नहीं किया। इसे घोर लापरवाही, आदेशों की अवहेलना, स्वेच्छाचारिता और मनमानेपन का मामला मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page