अधिवक्ताओं को आवंटित जमीन पर निर्माण रुकवाने के आरोप से भड़के वकील, सिविल कोर्ट के बाहर सड़क जाम

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 19 सितंबर 2026

गयाजी: शहर स्थित सिविल कोर्ट के बाहर शनिवार शाम उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब अधिवक्ताओं को कथित रूप से आवंटित जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को पुलिस द्वारा रुकवाए जाने के विरोध में गया बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने सड़क जाम कर दिया। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित हुआ। राहगीरों एवं वाहन चालकों को काफी देर तक परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुलिस पर निर्माण कार्य रुकवाने का आरोप

जमीन पर निर्माण कार्य करा रहे अधिवक्ता शशि भूषण मालवीय ने सिविल लाइन थाना के एक पुलिस अधिकारी पर मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन की ओर से अधिवक्ताओं के लिए जमीन आवंटित की गई है।

मालवीय के अनुसार, आवंटित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराया गया था और काम चल रहा था। इसी दौरान सिविल लाइन थाना के एक दरोगा मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य बंद करने को कहा। उनका दावा है कि उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा कि यदि जमीन अथवा निर्माण कार्य को लेकर कोई आपत्ति है तो जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी से बात की जाए। उनके मुताबिक, जमीन आवंटन से संबंधित दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं।

लिखित आदेश दीजिए, हम काम बंद कर देंगे’

गया बार एसोसिएशन के सचिव रविंद्र प्रसाद ने बताया कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से कहा गया कि यदि निर्माण कार्य रोकने का कोई आदेश है तो उसे लिखित रूप में दिया जाए। उनका कहना है कि लिखित आदेश मिलने पर निर्माण कार्य रोक दिया जाएगा, लेकिन कथित तौर पर कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया।

अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की चेतावनी दी गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता

निर्माण कार्य रोके जाने की सूचना के बाद अधिवक्ता आक्रोशित हो गए और सिविल कोर्ट के बाहर सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कोर्ट आने-जाने वाले लोगों और आम राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि जमीन जिला प्रशासन की ओर से आवंटित की गई है और निर्माण कार्य रोकने का कोई प्रशासनिक या कानूनी आधार है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका कहना था कि निर्माण रोकने से संबंधित कोई वैध आदेश है तो उसे लिखित रूप में उपलब्ध कराया जाए।

प्रशासन से जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग

अधिवक्ता शशि भूषण मालवीय ने जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण कार्य रोकने का आदेश किस स्तर से दिया गया और पुलिस को किस आधार पर निर्माण रोकने के लिए भेजा गया। मालवीय ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है और मामले का समाधान बातचीत तथा प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए।

पुलिस-प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी

इस पूरे मामले में पुलिस एवं जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में निर्माण कार्य रोकने की वास्तविक वजह और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का आधार प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल सड़क जाम और निर्माण कार्य रोके जाने को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप ही सामने आए हैं।

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