बाजरा रोग पर शोध के लिए सीयूएसबी के वैज्ञानिक को मिली 70 लाख रुपये की अनुसंधान अनुदान राशि

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 जून 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कृषि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रणव त्रिपाठी को भारत सरकार की अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) से 69.5 लाख रुपये का प्रमुख अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान ‘डेवलपमेंट ऑफ ए रैपिड ऐसे फॉर डिटेक्शन ऑफ फुसारियम ग्रामीनेअरम फॉर मिटिगेशन ऑफ डिसीजेज इन मिलेट्स’ शीर्षक वाली परियोजना के लिए प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट योजना के तहत मिली स्वीकृति

यह महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना एएनआरएफ की प्रधानमंत्री अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। इस उपलब्धि पर सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह और कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने डॉ. त्रिपाठी को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण बताया।

कृषि एवं विकास अध्ययन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अवनीश प्रकाश सिंह सहित विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने भी डॉ. त्रिपाठी को शुभकामनाएं दीं और परियोजना के सफल क्रियान्वयन की कामना की।

बाजरा फसलों में रोग की त्वरित पहचान पर केंद्रित होगा शोध

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि यह परियोजना ‘फुसारियम ग्रामीनेअरम’ नामक प्रमुख फफूंदजनित रोगजनक की शीघ्र और विश्वसनीय पहचान के लिए एक त्वरित निदान परीक्षण विकसित करने पर केंद्रित है। यह रोगजनक फसलों में गंभीर बीमारियों का कारण बनता है और कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है।

किसानों और खाद्य सुरक्षा को मिलेगा लाभ

प्रस्तावित अनुसंधान के माध्यम से मिलेट यानी बाजरा फसलों में रोगों की समय रहते पहचान और प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। इससे फसलों के स्वास्थ्य, उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही, किसानों को फसल नुकसान से बचाने और उनकी आय बढ़ाने में भी यह शोध महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सीयूएसबी को मिली नई पहचान

कुलपति प्रो. के. एन. सिंह ने कहा कि इस प्रकार का प्रतिष्ठित अनुसंधान सहयोग विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता, नवाचार और समाजोपयोगी वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, कुलसचिव प्रो. एन. के. राणा ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और मील का पत्थर बताया।

यह परियोजना पादप रोग विज्ञान और आणविक निदान के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान को नई दिशा देगी, जिसका प्रत्यक्ष लाभ कृषि क्षेत्र, किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा।

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