सीयूएसबी में नवगठित संस्थागत नैतिकता समिति की पहली बैठक, स्वास्थ्य चुनौतियों पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 11 सितंबर 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान संबंधी संस्थागत नैतिकता समिति (आईईसीबीएचआर) की नवगठित समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-आरएमआरआईएमएस), पटना के निदेशक एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. कृष्ण पांडेय ने की। बैठक में समिति के सदस्यों के साथ विभिन्न चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों तथा सीयूएसबी के प्रोफेसरों ने हिस्सा लिया।

विशेषज्ञों ने जिम्मेदार स्वास्थ्य अनुसंधान पर रखा जोर

बैठक में नैतिक समीक्षा तथा उत्तरदायी जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान शोध कार्यों में नैतिक मानकों के पालन, अनुसंधान की गुणवत्ता तथा समाज के लिए उपयोगी स्वास्थ्य अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक में प्रो. मनीष मंडल, शल्य जठरांत्र विज्ञान एवं यकृत प्रत्यारोपण विभाग, आईजीआईएमएस पटना; प्रो. राकेश कुमार, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, आईजीआईएमएस पटना; प्रो. संतोष कुमार, जैवरसायन विभाग, एनएमसीएच पटना तथा डॉ. विनय कुमार तिवारी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, वास्तु विहार बायोटेक, बोधगया सहित सीयूएसबी के प्रोफेसर शामिल हुए।

स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध की जरूरत

समिति के सदस्यों ने सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह से भी संवाद किया। कुलपति ने गयाजी और आसपास के जिलों में मौजूद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोगात्मक एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने विशेष रूप से कुपोषण से संबंधित रोगों, क्षय रोग (टीबी), मस्तिष्कावरण शोथ (मेनिन्जाइटिस) तथा बढ़ते यकृत रोगों पर शोध की संभावनाओं को तलाशने पर जोर दिया। इनमें यकृत कैंसर और यकृत फोड़ा जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग पर जोर

कुलपति ने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। ऐसे सहयोग से बहुविषयक और समुदाय-केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं, जिनका सीधा लाभ स्थानीय समाज को मिल सके।

प्रो. रिजवानुल हक और डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया समन्वय

सीयूएसबी के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि बैठक का समन्वय प्रो. रिजवानुल हक, अधिष्ठाता, पृथ्वी, जैविक एवं पर्यावरणीय विज्ञान विद्यालय (एसईबीईएस) तथा डॉ. अमृता श्रीवास्तव, जीवन विज्ञान विभाग एवं सचिव, जैव-चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य अनुसंधान संबंधी संस्थागत नैतिकता समिति (आईईसीबीएचआर) ने किया।

बैठक को गयाजी एवं आसपास के क्षेत्रों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर नए शोध एवं सहयोग की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।

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