14 अगस्त तक 1 करोड़ टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य, मुख्य सचिव ने मिशन मोड में अभियान चलाने का दिया निर्देश

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 02 जुलाई 2026,

बिहार को टीबी (क्षय रोग) मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ की प्रगति की समीक्षा गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। समीक्षा के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आगामी 14 अगस्त 2026 तक राज्य में 1 करोड़ लोगों की टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए और इसके लिए अभियान को पूरी तरह मिशन मोड में संचालित किया जाए।

अब तक केवल 14 प्रतिशत आबादी की हुई स्क्रीनिंग

बैठक में बताया गया कि बिहार में टीबी स्क्रीनिंग के लिए 2.76 करोड़ लोगों की पहचान की गई है। इनमें अब तक केवल 0.39 करोड़ (करीब 14 प्रतिशत) लोगों की ही स्क्रीनिंग हो सकी है। इस प्रगति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अभियान की गति तेज करने के निर्देश दिए।

हर जिले में माइक्रोप्लान और सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड के लिए एक वरीय उप समाहर्ता या नोडल पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जाए, जो प्रतिदिन और साप्ताहिक स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यों की निगरानी करेंगे। उन्होंने राज्य की 674 आरबीएसके (RBSK) मोबाइल हेल्थ टीमों का अधिकतम उपयोग करते हुए स्कूलों, छात्रावासों, महादलित टोलों और जेलों में विशेष स्क्रीनिंग शिविर आयोजित करने के लिए विस्तृत माइक्रोप्लान तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही, सभी जांच संबंधी आंकड़ों की प्रतिदिन निक्षय पोर्टल पर प्रविष्टि सुनिश्चित करने को कहा।

सभी विभागों की तय की गई जिम्मेदारी

अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां भी तय की गईं।

🔹शिक्षा विभाग को माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शत-प्रतिशत छात्रों की स्क्रीनिंग कराने का निर्देश दिया गया।

🔹अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग को विकास मित्रों के माध्यम से महादलित टोलों में जागरूकता फैलाने और छात्रावासों में विशेष जांच अभियान चलाने को कहा गया।

🔹ग्रामीण विकास विभाग को जीविका दीदियों और स्वयं सहायता समूहों की बैठकों के माध्यम से लोगों को टीबी जांच के प्रति जागरूक कर विशेष शिविरों से जोड़ने का निर्देश मिला।

🔹पंचायती राज विभाग को पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें ‘निक्षय मित्र’ बनने और टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए प्रेरित करने को कहा गया।


आधुनिक तकनीक से होगी जांच, मरीजों को मिलेगी बेहतर देखभाल

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में प्रतिदिन कम से कम 10 टीबी स्क्रीनिंग तथा प्रत्येक मोबाइल हेल्थ टीम द्वारा प्रतिदिन 100 लोगों की जांच सुनिश्चित की जाए। टीबी की पुष्टि के लिए ट्रूनेट (TruNAAT) और सीबीनेट (CBNAAT) जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा संवेदनशील आबादी के लिए एक्स-रे जांच बढ़ाने तथा चिन्हित मरीजों की नियमित स्वास्थ्य जांच कर डिफरेंशिएटेड टीबी केयर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

निक्षय मित्रों के माध्यम से मिलेगा पोषण सहयोग

बैठक में जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि आईओसीएल, एनटीपीसी, पावरग्रिड, बीएसपीटीसीएल सहित प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से सभी पंजीकृत निक्षय मित्रों के माध्यम से टीबी मरीजों को पोषणयुक्त फूड बास्केट का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित किया जाए।

गयाजी समाहरणालय से जुड़े रहे अधिकारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गयाजी समाहरणालय में जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (राजस्व), अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था), सिविल सर्जन समेत स्वास्थ्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

लक्ष्य पूरा करने पर मुख्य सचिव का जोर

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व का अभियान है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को स्वयं साप्ताहिक समीक्षा करने का निर्देश देते हुए कहा कि 14 अगस्त 2026 तक निर्धारित लक्ष्य हर हाल में हासिल किया जाए, ताकि बिहार को टीबी मुक्त राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित हो सके।

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