सीयूएसबी के एमएसडब्ल्यू विद्यार्थियों ने डेल्हा स्थित सेंटर डायरेक्ट एनजीओ का किया भ्रमण

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 18 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग की ओर से मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए गयाजी शहर के डेल्हा स्थित सेंटर डायरेक्ट गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। प्रो. एम. विजय कुमार शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डॉ. हरेश नारायण पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने संस्था के कार्यों एवं उसकी कार्यप्रणाली को करीब से समझा।

24 जिलों में बाल संरक्षण और बालिका शिक्षा पर कार्य

सेंटर डायरेक्ट के प्रोग्राम मैनेजर दीना नाथ मौर्य ने विद्यार्थियों को संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगठन बिहार के सभी 24 जिलों में व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। वर्तमान में संस्था के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में बाल संरक्षण और बालिकाओं की शिक्षा शामिल है।

उन्होंने बताया कि संस्था विशेष रूप से 6 से 14 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के उन बच्चों, खासकर बालिकाओं पर ध्यान केंद्रित करती है, जो पारिवारिक अथवा माता-पिता से संबंधित विभिन्न कारणों से विद्यालय छोड़ देती हैं। ऐसी बालिकाओं का दोबारा विद्यालय में नामांकन कराने में संस्था सहायता करती है।

18 हजार स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान

विद्यार्थियों को बताया गया कि सेंटर डायरेक्ट द्वारा बिहार में लगभग 18,000 स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान की गई है। इनमें से लगभग 8,000 बालिकाओं का सफलतापूर्वक विद्यालय में पुनः नामांकन कराया जा चुका है। संस्था ने आगामी वर्ष में 10,000 और बालिकाओं का पुनः विद्यालय में नामांकन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

बाल विवाह और बाल तस्करी जैसी समस्याओं पर भी काम

फील्ड वर्कर बाल विवाह, शारीरिक शोषण, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी समस्याओं से प्रभावित तथा संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के साथ कार्य करते हैं। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को कार्यालय में ‘कवच’ कार्यक्रम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के बारे में जानकारी दी गई।

इसके साथ ही विद्यार्थियों ने बाल कल्याण समितियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया तथा बच्चों के लिए कार्यरत आपातकालीन चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।

बच्चों के संरक्षण से जुड़े सरकारी तंत्र की दी जानकारी

सेंटर डायरेक्ट के डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने बिहार में बच्चों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए कार्यरत विभिन्न सरकारी तंत्रों एवं संस्थाओं के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया, किशोर न्याय बोर्ड के कार्यों तथा बाल समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया।

विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक अनुभव

कार्यक्रम के माध्यम से एमएसडब्ल्यू विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्था की कार्यप्रणाली को समझने का व्यावहारिक अनुभव मिला। अंत में सीयूएसबी की टीम ने विद्यार्थियों को बेहतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सेंटर डायरेक्ट और उसके कार्यालय के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 18 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग की ओर से मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए गयाजी शहर के डेल्हा स्थित सेंटर डायरेक्ट गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। प्रो. एम. विजय कुमार शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डॉ. हरेश नारायण पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने संस्था के कार्यों एवं उसकी कार्यप्रणाली को करीब से समझा।

24 जिलों में बाल संरक्षण और बालिका शिक्षा पर कार्य

सेंटर डायरेक्ट के प्रोग्राम मैनेजर दीना नाथ मौर्य ने विद्यार्थियों को संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगठन बिहार के सभी 24 जिलों में व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। वर्तमान में संस्था के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में बाल संरक्षण और बालिकाओं की शिक्षा शामिल है।

उन्होंने बताया कि संस्था विशेष रूप से 6 से 14 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के उन बच्चों, खासकर बालिकाओं पर ध्यान केंद्रित करती है, जो पारिवारिक अथवा माता-पिता से संबंधित विभिन्न कारणों से विद्यालय छोड़ देती हैं। ऐसी बालिकाओं का दोबारा विद्यालय में नामांकन कराने में संस्था सहायता करती है।

18 हजार स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान

विद्यार्थियों को बताया गया कि सेंटर डायरेक्ट द्वारा बिहार में लगभग 18,000 स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान की गई है। इनमें से लगभग 8,000 बालिकाओं का सफलतापूर्वक विद्यालय में पुनः नामांकन कराया जा चुका है। संस्था ने आगामी वर्ष में 10,000 और बालिकाओं का पुनः विद्यालय में नामांकन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

बाल विवाह और बाल तस्करी जैसी समस्याओं पर भी काम

फील्ड वर्कर बाल विवाह, शारीरिक शोषण, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी समस्याओं से प्रभावित तथा संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के साथ कार्य करते हैं। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को कार्यालय में ‘कवच’ कार्यक्रम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के बारे में जानकारी दी गई।

इसके साथ ही विद्यार्थियों ने बाल कल्याण समितियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया तथा बच्चों के लिए कार्यरत आपातकालीन चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।

बच्चों के संरक्षण से जुड़े सरकारी तंत्र की दी जानकारी

सेंटर डायरेक्ट के डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने बिहार में बच्चों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए कार्यरत विभिन्न सरकारी तंत्रों एवं संस्थाओं के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया, किशोर न्याय बोर्ड के कार्यों तथा बाल समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया।

विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक अनुभव

कार्यक्रम के माध्यम से एमएसडब्ल्यू विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्था की कार्यप्रणाली को समझने का व्यावहारिक अनुभव मिला। अंत में सीयूएसबी की टीम ने विद्यार्थियों को बेहतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सेंटर डायरेक्ट और उसके कार्यालय के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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