विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में उच्च शिक्षा की भूमिका अहम : कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह

0
IMG-20260626-WA0002.jpg
Share with

आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 26 जून 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमएमटीटीपीपी) योजना के अंतर्गत 24 दिवसीय आवासीय ‘गुरु दक्षता कार्यक्रम’ (फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम-एफडीपी) का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने ‘विकसित भारत@2047 के लिए उच्च शिक्षा : दृष्टि, मिशन, रणनीतिक नियोजन एवं शिक्षकों के क्षमता निर्माण’ विषय पर व्याख्यान दिया।

राष्ट्र निर्माण में उच्च शिक्षा संस्थानों की केंद्रीय भूमिका

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विशाल युवा जनसंख्या को राष्ट्र निर्माण की शक्ति के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों के क्षमता निर्माण एवं संस्थागत विकास के लिए “राष्ट्रीयकरण, भारतीयकरण एवं अध्यात्मीकरण” को आवश्यक बताया।

‘ज्ञान’ अवधारणा से होगा समावेशी विकास

कुलपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘जीवाईएएन-ज्ञान’ (गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारीशक्ति) की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए इन चारों वर्गों का सशक्तिकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, अवसर और संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

नई शिक्षा नीति-2020 से मिलेगा विकसित भारत को आधार

प्रो. सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) पंचकोशीय शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास को प्रोत्साहित करती है। यह नीति 21वीं सदी की चुनौतियों, आवश्यकताओं और अवसरों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और भारतीय युवाओं को उत्तरदायी, संवेदनशील एवं सक्षम नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 भारत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत@2047’ की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत आधार प्रदान करती है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय जरूरी

कुलपति ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में ‘आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय’ की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सीयूएसबी में संचालित विभिन्न नवाचारों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं की जानकारी देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियां भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ तथा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास एवं सबका सम्मान’ की भावना पर आधारित हैं।

समावेशी विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया बल

उन्होंने स्वदेशी और स्वावलंबन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को समावेशी विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट शोध और प्रभावी विस्तार गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

बिहार और झारखंड के 42 शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि संकाय के अधिष्ठाता एवं कृषि विभागाध्यक्ष प्रो. अवनीश प्रकाश सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने नव नियुक्त शिक्षकों का स्वागत करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि 24 दिवसीय आवासीय गुरु दक्षता कार्यक्रम एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. तरुण कुमार त्यागी, कृषि विभाग के डॉ. हेमंत कुमार सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के आतिश दाश तथा शिक्षक शिक्षा विभाग की लेफ्टिनेंट डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के समन्वित प्रयासों से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में बिहार एवं झारखंड के 10 विश्वविद्यालयों से आए 42 नवनियुक्त शिक्षक भाग ले रहे हैं।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन

सत्र का समापन शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता एवं शिक्षक-शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कुलपति, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

You cannot copy content of this page