‘आपातकाल के 51 वर्ष’ विषय पर सीयूएसबी में विशेष कार्यक्रम आयोजित, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का लिया संकल्प

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 25 जून 2026,

गयाजी: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) में गुरुवार को “आपातकाल के 51 वर्ष” विषय पर एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. के. एन. सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेते हुए आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करना था।

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ नेतृत्व एवं शिक्षाविदों ने आपातकाल के ऐतिहासिक संदर्भ, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और नागरिक चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं में छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) प्रो. पवन कुमार मिश्रा, कुलानुशासक एवं सामाजिक विज्ञान एवं नीति अध्ययन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रणव कुमार तथा विधि एवं शासन विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. अशोक कुमार शामिल थे। इसके अलावा डॉ. पवन कुमार सिंह एवं राजनीति अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

आपातकाल को बताया इतिहास की महत्वपूर्ण सीख

वक्ताओं ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि इससे मिली सीख आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से इतिहास का गंभीर अध्ययन करने तथा किसी भी प्रकार की अधिनायकवादी मानसिकता के प्रति सदैव सतर्क रहने का आह्वान किया।

भारतीय लोकतंत्र की जड़ों पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दौरान भारतीय लोकतंत्र की गहरी और प्राचीन परंपराओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य कोई बाहरी या विदेशी अवधारणा नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। भारत में सामूहिक निर्णय-निर्माण और विचार-विमर्श की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो आज भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का लिया संकल्प

कार्यक्रम का समापन सीयूएसबी के शैक्षणिक समुदाय द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, संवर्धन और उन्हें सुदृढ़ बनाए रखने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ। वक्ताओं ने छात्रों से संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी बनने का आह्वान किया।

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