बोधगया पहुंचीं थाईलैंड की रानी चाओखुन फ्रा सिनीनात बिलासकल्याणी, महाबोधि मंदिर में की विशेष पूजा-अर्चना

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 जनवरी 2026,

बोधगया; थाईलैंड की रानी चाओखुन फ्रा सिनीनात बिलासकल्याणी बुधवार को छह दिवसीय आध्यात्मिक दौरे पर विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ बोधगया पहुंचीं। आगमन के साथ ही उन्होंने महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध के समक्ष मत्था टेककर प्रार्थना की। रानी ने बोधगया की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्र वातावरण को लेकर गहरी अनुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि यहां आकर वे अत्यंत अभिभूत हैं।

पहले दिन रानी ने महाबोधि मंदिर परिसर में विधिवत अनुष्ठान में भाग लिया। उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित किए और पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे ध्यान साधना की, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस दौरान मंत्रोच्चार और विशेष प्रार्थना समारोह का आयोजन भी किया गया। रानी के लिए यह क्षण भावुक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

भारत–थाईलैंड के प्राचीन बौद्ध संबंधों का प्रतीक

भारत और थाईलैंड के बीच बौद्ध धर्म के माध्यम से सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध रहे हैं। थाईलैंड में बौद्ध धर्म प्रमुख आस्था है और बोधगया वहां के बौद्ध अनुयायियों के लिए सर्वोच्च तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। रानी का यह दौरा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक बौद्ध विरासत और आपसी सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है।

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बीटीएमसी व जिला प्रशासन ने किया भव्य स्वागत

रानी के आगमन पर बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमिटी (बीटीएमसी) की ओर से भव्य स्वागत किया गया। बीटीएमसी सचिव महाश्वेता महारथी, अरविंद कुमार सिंह, भिक्षु चालिंदा, भिक्षु दीनानाथ, भिक्षु डॉ. मनोज सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर रानी को स्मृति चिन्ह तथा पवित्र बोधि वृक्ष के पत्ते भेंट किए गए, जो स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए थे और बोधगया की पारंपरिक शिल्पकला को दर्शाते हैं।

द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा

बीटीएमसी सचिव महाश्वेता महारथी ने बताया कि रानी का यह छह दिवसीय दौरा 21 जनवरी से 26 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान वे बोधगया और आसपास के अन्य प्रमुख बौद्ध स्थलों का भ्रमण करेंगी, विशेष प्रार्थना सभाओं में भाग लेंगी तथा ध्यान सत्रों में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा न केवल थाईलैंड की रानी के लिए आध्यात्मिक शांति का माध्यम है, बल्कि भारत–थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को नई ऊर्जा देने वाली भी है।

अभिभूत हुईं रानी, जताई खुशी

बोधगया पहुंचने पर रानी ने कहा कि यहां का शांत वातावरण और आध्यात्मिक विरासत उन्हें गहराई से प्रभावित कर रही है। यह दौरा उनके लिए व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा होने के साथ-साथ दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत का उत्सव भी है। रानी की इस ऐतिहासिक यात्रा से स्थानीय लोगों और बौद्ध समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

ध्यानमग्न थाईलैंड की रानी

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