दिखावे का पुस्तकालय बना सरकारी उपेक्षा की मिसाल, जर्जर भवन में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
आर्यावर्त वाणी | जहानाबाद | 03 जून 2026,
जहानाबाद/हुलासगंज: शिक्षा और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई योजनाओं की पोल खोल रही है। जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड अंतर्गत सलेमपुर गांव में वर्ष 2013 में निर्मित पुस्तकालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पुस्तकालय भवन में एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है, जिससे यह सिर्फ नाम का पुस्तकालय बनकर रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुस्तकालय के निर्माण के बाद कभी भी यहां नियमित रूप से पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं। वर्तमान में भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई देती हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और छत भी कमजोर नजर आती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया था, जिसके कारण मात्र कुछ वर्षों में भवन खस्ताहाल हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पुस्तकालय के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन उसका लाभ गांव के छात्रों और युवाओं को कभी नहीं मिल सका। वर्तमान स्थिति को देखकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
“पुस्तकालय बनने के समय हम लोगों को उम्मीद थी कि गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए अच्छी सुविधा मिलेगी, लेकिन आज तक यहां एक भी किताब नहीं देखी। भवन भी पूरी तरह टूट-फूट चुका है।”
सुरेन्द्र शर्मा, ग्रामीण
“सरकार ने शिक्षा के लिए भवन तो बनवा दिया लेकिन उसकी देखभाल कभी नहीं हुई। जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जांच करानी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
संजय सिंह, ग्रामीण
आंगनबाड़ी केंद्र भी खतरे के साये में
पुस्तकालय के ठीक बगल में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। केंद्र का भवन भी जर्जर अवस्था में है और उसकी दीवारों में भी दरारें दिखाई देती हैं। वर्तमान में गर्मी की छुट्टियों के कारण केंद्र बंद है, लेकिन केंद्र खुलने के बाद यहां पढ़ने आने वाले छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता व्याप्त है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए।
“हम चाहते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत जल्द हो ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें। बच्चों की जान से बड़ा कुछ नहीं है।”
सियामणी देवी, ग्रामीण
“आंगनबाड़ी केंद्र की हालत देखकर डर लगता है। छोटे-छोटे बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। अगर कोई दीवार या छत का हिस्सा गिर जाए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।”
पूनम देवी, ग्रामीण
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से पुस्तकालय और आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति की जांच कराने, भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने तथा पुस्तकालय में पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होंगे।
सलेमपुर गांव का यह मामला विकास योजनाओं की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हुए कब तक ठोस कार्रवाई करता है।
