शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना, जानें पूजा विधि, मंत्र और महत्व

0
Screenshot_2026_1016_165119
Share with

आर्यावर्त वाणी | पटना | 15 अक्टूबर 2026

शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति, शक्ति और संतान के कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में श्रद्धालु विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं तथा परिवार की खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।

मां स्कंदमाता को ममता, करुणा और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना भक्तों को यह संदेश देती है कि जीवन में शक्ति के साथ प्रेम, धैर्य और जिम्मेदारी का होना भी आवश्यक है।

कौन हैं मां स्कंदमाता?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को स्कंद नाम से भी जाना जाता है। स्कंद की माता होने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है।

मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत सौम्य और ममतामयी माना गया है। उनकी चार भुजाएं बताई जाती हैं। दो हाथों में कमल पुष्प, एक हाथ में भगवान स्कंद बालरूप में विराजमान रहते हैं, जबकि दूसरे हाथ से माता भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। उन्हें कमल पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका वाहन सिंह है।

मां का यह स्वरूप शक्ति और वात्सल्य के अद्भुत संगम को दर्शाता है। गोद में बाल स्कंद को धारण करने वाली माता अपने भक्तों के प्रति स्नेह और संरक्षण का भाव प्रकट करती हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। संतान की सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना से भी माता की पूजा की जाती है।

मान्यता है कि मां की कृपा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उनकी आराधना व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने, परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने और दूसरों के प्रति करुणा रखने की प्रेरणा देती है।

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के साथ-साथ भगवान कार्तिकेय का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल की सफाई करते हैं। इसके बाद मां दुर्गा तथा मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।

पूजा के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं—

1. संकल्प: हाथ में जल लेकर मां स्कंदमाता की पूजा और परिवार के कल्याण का संकल्प लें।
2. आवाहन और पूजन: मां का ध्यान करते हुए उन्हें पुष्प, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
3. कमल पुष्प अर्पण: मां स्कंदमाता को कमल पुष्प प्रिय माने जाते हैं। उपलब्धता के अनुसार अन्य स्वच्छ पुष्प भी अर्पित किए जा सकते हैं।
4. मंत्र जाप: मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
5. भोग अर्पण: फल, मिठाई या अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक प्रसाद अर्पित करें।
6. आरती और प्रार्थना: मां की आरती कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करें।

पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और विचारों में पवित्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

मां स्कंदमाता का मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता के इस मंत्र का जाप किया जाता है—

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

इस मंत्र का जाप श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार 11, 21 या 108 बार कर सकते हैं। मंत्र जाप के समय मन को शांत रखकर मां के ममतामयी स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

मां स्कंदमाता का ध्यान करने के लिए प्रचलित ध्यान श्लोक भी पढ़ा जाता है—

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

मां स्कंदमाता को क्या चढ़ाएं भोग?

धार्मिक परंपराओं में मां स्कंदमाता को केला और अन्य फल अर्पित करने की मान्यता प्रचलित है। कुछ परंपराओं में मिठाई और खीर जैसे सात्त्विक व्यंजन भी भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं।

भोग में शुद्धता और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है। प्रसाद अर्पित करने के बाद उसे परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जा सकता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार भोग में अंतर हो सकता है।

मां स्कंदमाता का प्रिय रंग

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में सफेद या पीले रंग के वस्त्र और पुष्पों का प्रयोग कई परंपराओं में शुभ माना जाता है। हालांकि रंगों से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भाव है।

मां स्कंदमाता की आराधना से मिलता है मातृत्व और करुणा का संदेश

मां स्कंदमाता का स्वरूप केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में ममता, धैर्य, त्याग और जिम्मेदारी के महत्व को भी दर्शाता है। मां की गोद में विराजमान बाल स्कंद यह संदेश देते हैं कि शक्ति का वास्तविक उद्देश्य संरक्षण करना और कमजोरों को सहारा देना है।

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते हुए श्रद्धालुओं को अपने परिवार के साथ-साथ समाज के प्रति भी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना, बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का ध्यान रखना तथा घर-परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखना भी मां के ममतामयी स्वरूप से प्रेरित जीवन-मूल्य हैं।

मां स्कंदमाता से सुख-शांति और मंगल की कामना

शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन भक्तों के लिए श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन का अवसर है। मां स्कंदमाता की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली, संतान के उज्ज्वल भविष्य और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।

मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को आंतरिक शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां स्कंदमाता सभी के जीवन में प्रेम, सद्भाव, करुणा और मंगल का संचार करें—इसी कामना के साथ श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाते हैं।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

You cannot copy content of this page