गया कॉलेज में मेडिटेशन सत्र का आयोजन, विशेषज्ञों ने बताया मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में ध्यान का महत्व
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 07 नवम्बर 2026,
गयाजी। वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच ध्यान (मेडिटेशन) की उपयोगिता को लेकर गया कॉलेज, गयाजी के शिक्षा शास्त्र विभाग में विशेष मेडिटेशन सत्र का आयोजन किया गया। शनिवार, 7 नवंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए ध्यान की विभिन्न तकनीकों और उनके व्यावहारिक लाभों की जानकारी दी गई।
गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने बताई ध्यान की उपयोगिता
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र के दिशा-निर्देशन में तथा शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय धीरज के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रीना कुमारी उपस्थित रहीं।
उन्होंने मेडिटेशन की विभिन्न तकनीकों, उनके व्यावहारिक प्रयोग और दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मेडिटेशन केवल मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
तनावपूर्ण जीवनशैली में मेडिटेशन को बताया जरूरी
इस अवसर पर सिक्किम शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता बेहतर हो सकती है।
उन्होंने वर्तमान तनावपूर्ण जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मेडिटेशन उपयोगी भूमिका निभा सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में इसकी महत्ता बताते हुए उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों को इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी जरूरी : डॉ. धनंजय धीरज
विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय धीरज ने मेडिटेशन के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन का होना भी आवश्यक है। मेडिटेशन व्यक्ति को तनावमुक्त रहने, आत्मनियंत्रण विकसित करने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में सहायता करता है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अनेक देशों में मेडिटेशन को स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली के महत्वपूर्ण अंग के रूप में अपनाया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इसके अभ्यास से विद्यार्थियों में एकाग्रता, अनुशासन, धैर्य और सीखने की क्षमता को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में शिक्षा शास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ. मोहम्मद सदरे आलम, अजय शर्मा, निखत परवीन एवं विदुषी कुमारी सहित शिक्षकेत्तर कर्मचारी मुजाहिद इमाम, अहमद, अश्वनी कुमार, ताजवर नाज, संगीता कुमारी, मोहम्मद साबिर अली और विकास कुमार उपस्थित रहे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्र के दौरान मेडिटेशन के अभ्यास, मानसिक शांति, तनाव प्रबंधन, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
बेहतर जीवनशैली के लिए नियमित अभ्यास का संदेश
कार्यक्रम के अंत में नियमित मेडिटेशन के महत्व पर जोर देते हुए बताया गया कि ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को मानसिक रूप से स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित बनाए रखने में सहायक हो सकता है। साथ ही इसका सकारात्मक प्रभाव व्यक्तिगत, शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन पर भी पड़ सकता है।
