वृद्धजनों के अधिकार, कल्याण एवं संरक्षण पर मानपुर वृद्धाश्रम में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 15 जून 2026,
गयाजी: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गयाजी, प्रदीप कुमार मलिक के निर्देश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के मार्गदर्शन में जागृति योजना-2025 के अंतर्गत मानपुर स्थित सहारा वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, कल्याण एवं संरक्षण विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
वरिष्ठ नागरिकों को बताए गए कानूनी अधिकार
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अरविंद कुमार दास मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007, निःशुल्क विधिक सहायता, संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों तथा उनके संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उनके सम्मान, सुरक्षा तथा गरिमा की रक्षा करना सभी का दायित्व है।
साइबर ठगी और संपत्ति अधिकारों पर भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ नागरिकों को साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव, संपत्ति संबंधी अधिकार, भरण-पोषण के अधिकार तथा सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें बताया गया कि किसी भी प्रकार की उपेक्षा, प्रताड़ना या अधिकारों के हनन की स्थिति में वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक रहे उपस्थित
शिविर में पैनल अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह, पारा विधिक स्वयंसेवक सन्तन कुमार, डीएलएसए कर्मचारी विकास कुमार, सहारा वृद्धाश्रम के अधीक्षक मनोज कुमार, मीनू कुमारी, सोनू कुमार, नीरज कुमार पाल सहित अन्य कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।
आगे भी जारी रहेंगे जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम के समापन पर सचिव अरविंद कुमार दास ने कहा कि जागृति योजना-2025 के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, कल्याण एवं संरक्षण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि वृद्धजनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके और उन्हें समय पर कानूनी सहायता उपलब्ध हो सके।
