प्रेम प्रसंग में दो मासूम बच्चों की हत्या: 9 वर्ष बाद आया फैसला, गयाजी कोर्ट ने मां को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 जुलाई 2026,
गयाजी: जिले में वर्ष 2017 में हुए बहुचर्चित दोहरे बाल हत्याकांड में करीब नौ वर्ष बाद अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गयाजी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम (एडीजे-1) शशिकांत ओझा की अदालत ने अपने दो मासूम बच्चों की हत्या की दोषी ब्यूटी देवी को भारतीय न्यायिक प्रावधानों के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया है। दोषी महिला वर्ष 2017 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
2017 में हुई थी दिल दहला देने वाली घटना
अभियोजन के अनुसार, 7 फरवरी 2017 की रात गुरारू थाना क्षेत्र के तिलोरी गांव में ब्यूटी देवी ने अपने दो वर्षीय पुत्र भोलू कुमार और चार वर्षीय पुत्री गुड़िया कुमारी को उस समय आग के हवाले कर दिया, जब दोनों मासूम घर में खाट पर सो रहे थे। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। लौटने पर दोनों बच्चों के जले हुए शव मिलने से पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था।
प्रेम संबंध को लेकर हत्या का आरोप
मृत बच्चों के दादा उदय शंकर सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि ब्यूटी देवी का एक अन्य युवक से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहती थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी अपने दोनों बच्चों को इस संबंध में बाधा मानती थी और इसी कारण उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उसे मुख्य अभियुक्त बनाया गया।
आठ गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
गुरारू थाना कांड संख्या 19/17 में दर्ज इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक कमलेश कुमार सिन्हा ने आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए। पुलिस द्वारा समर्पित चार्जशीट, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर अदालत ने ब्यूटी देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई।
एसएसपी बोले- साक्ष्यों के आधार पर मिली सजा
गया के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुशील कुमार ने कहा कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट एवं अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोहरे हत्याकांड में दोषी को आजीवन कारावास एवं ₹50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। उन्होंने इस मामले में अनुसंधान करने वाली पुलिस टीम के कार्य की सराहना की।
न्याय के साथ समाज के लिए भी एक संदेश
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज को झकझोर देने वाली त्रासदी भी है, जिसमें दो मासूम बच्चों की जान चली गई। अदालत का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बच्चों के विरुद्ध किए गए जघन्य अपराधों पर कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतता। साथ ही यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि पारिवारिक विवाद, व्यक्तिगत संबंध या मानसिक तनाव जैसी परिस्थितियों में हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। बच्चों की सुरक्षा, संवेदनशीलता और उनके अधिकारों की रक्षा समाज की साझा जिम्मेदारी है।
