सीयूएसबी की प्राध्यापिका डॉ. दास अम्बिका भारती ने इटली में अंतरराष्ट्रीय मनोविज्ञान सम्मेलन में किया भारत का प्रतिनिधित्व

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 26 जुलाई 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दास अम्बिका भारती ने इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 31वीं इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी (ICAP-2026) में भाग लेकर विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। 21 से 25 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में विश्वभर के मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।

गुरु-शिष्या की जोड़ी ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र

डॉ. दास अम्बिका भारती ने अपनी शोधार्थी शुभांगी श्री के साथ “New Directions in Applied Psychology” विषय पर आयोजित सम्मेलन के दो प्रमुख प्रभागों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए। दोनों के शोध में भारतीय मनोवैज्ञानिक अनुसंधान के महत्वपूर्ण योगदान को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया गया।

वृद्धावस्था पर भारतीय संदर्भ में प्रस्तुत किया महत्वपूर्ण शोध

डॉ. भारती ने डिवीजन-7: एप्लाइड जेरोन्टोलॉजी के अंतर्गत “Self-Perceptions of Aging as Predictors of Psychological Well-being and Successful Aging Among Older Indian Adults” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इस अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया कि वृद्धावस्था के प्रति व्यक्ति की स्वयं की धारणा भारतीय वरिष्ठ नागरिकों के मनोवैज्ञानिक कल्याण और सफल वृद्धावस्था को किस प्रकार प्रभावित करती है। यह शोध भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित जेरोन्टोलॉजिकल मनोविज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

आईसीएसएसआर से मिला ट्रैवल ग्रांट

डॉ. भारती के शोध को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), भारत सरकार द्वारा ट्रैवल ग्रांट का भी समर्थन प्राप्त हुआ। यह उनके शोध की गुणवत्ता और शैक्षणिक महत्व का प्रमाण माना जा रहा है।

शुभांगी श्री ने डेटिंग हिंसा पर रखा शोध

सम्मेलन में शोधार्थी शुभांगी श्री ने डिवीजन-8: हेल्थ साइकोलॉजी के अंतर्गत “A Systematic Review of Dating Violence: An Exploration for Health Impacts, Socio-Cultural Influence and Research Gap” विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। उनके अध्ययन में डेटिंग हिंसा के मनोवैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों, सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों तथा भारतीय संदर्भ में उपलब्ध शोध की कमियों का विश्लेषण किया गया। साथ ही सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील अनुसंधान और प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ रही सीयूएसबी की पहचान

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि डॉ. दास अम्बिका भारती अपने शोधार्थियों का लगातार मार्गदर्शन कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि विभाग के शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं।

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