सीयूएसबी की शोधार्थी कुमारी पलक ने हांगकांग में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया शोध-पत्र
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 जुलाई 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के आर्थिक अध्ययन एवं नीति विभाग की पीएचडी शोधार्थी कुमारी पलक ने चीन के हांगकांग स्थित हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (HKUST) में आयोजित 5वें एशियन इकोनॉमिक डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस (AEDC)-2026 में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का आयोजन एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), एशियन डेवलपमेंट बैंक इंस्टीट्यूट (ADBI) और HKUST द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
महिलाओं में एनीमिया पर शोध ने खींचा ध्यान
सम्मेलन के ‘जेंडर एंड वेल-बीइंग’ सत्र में कुमारी पलक ने “भारत के कोयला उत्पादक ज़िलों में महिलाओं में एनीमिया: संसाधन अभिशाप का एक स्थानीय स्वास्थ्य पहलू” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। इसके अलावा उन्होंने “लंबी मैटरनिटी लीव, पतियों की ज़्यादा कमाई: वियतनाम में 2013 में अनिवार्य मैटरनिटी लीव बढ़ाने का परिवार के भीतर असर” विषयक शोध-पत्र पर डिस्कसेंट (चर्चाकार) के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुलपति ने दी बधाई
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कुमारी पलक एवं उनके शोध-पर्यवेक्षक डॉ. अबोध कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान का प्रमाण है। वहीं कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा, विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णन चालिल तथा अर्थशास्त्र विभाग के अन्य शिक्षकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।
केवल 11 प्रतिशत शोध-पत्रों का हुआ चयन
जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि सम्मेलन में शोध-पत्रों के चयन की प्रक्रिया अत्यंत प्रतिस्पर्धी थी। दुनिया भर से प्राप्त शोध-पत्रों में से केवल 11 प्रतिशत शोध-पत्रों को प्रस्तुतीकरण के लिए चुना गया। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर कुमारी पलक के शोध-पत्र का चयन और उन्हें डिस्कसेंट की जिम्मेदारी मिलना उनके शोध कार्य की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
वैश्विक विशेषज्ञों से मिला संवाद का अवसर
सम्मेलन के दौरान कुमारी पलक को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अर्थशास्त्रियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के साथ विचार-विमर्श करने, अपने शोध पर विशेषज्ञों की राय प्राप्त करने तथा समकालीन विकास संबंधी मुद्दों पर वैश्विक दृष्टिकोण समझने का अवसर मिला।
