सीयूएसबी की शोधार्थी डॉ. निगहत परवीन को प्रतिष्ठित एएनआरएफ राष्ट्रीय पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 जुलाई 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के पर्यावरण विज्ञान विभाग की पीएचडी शोधार्थी डॉ. निगहत परवीन का चयन भारत सरकार के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप (एनपीडीएफ) के लिए हुआ है। यह फेलोशिप उन्हें दो वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की गई है, जो देश के युवा शोधकर्ताओं के लिए सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी शोध अवसरों में से एक मानी जाती है।
विश्वविद्यालय परिवार ने दी बधाई
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा, पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार रंजन, प्रो. राम कुमार, प्रो. प्रधान पार्थ सारथी, डॉ. प्रशांत, डॉ. एन. एल. देवी, डॉ. सोमा गिरी तथा विभाग के अन्य शिक्षकों ने डॉ. निगहत परवीन को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
जेएनयू में करेंगी पोस्ट-डॉक्टोरल शोध
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि डॉ. निगहत परवीन ने पर्यावरण विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोमा गिरी के निर्देशन में अपना पीएचडी शोधकार्य पूरा किया है। अब वह अपने पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकार्य के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली के स्कूल ऑफ एनवायर्नमेंटल साइंसेज से जुड़ेंगी।
देश की प्रतिष्ठित शोध फेलोशिपों में शामिल है एएनआरएफ एनपीडीएफ
पीआरओ ने बताया कि एएनआरएफ राष्ट्रीय पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा प्रतिभाशाली युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना है। इस फेलोशिप के तहत चयनित शोधकर्ताओं को प्रतिमाह फेलोशिप राशि, शोध अनुदान और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अत्याधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य कर सकें।
सीयूएसबी के लिए गौरव का क्षण
डॉ. निगहत परवीन का चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में हो रहे गुणवत्तापूर्ण शोध, उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण और शोध संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखी जा रही है।
