सीयूएसबी में दीनदयाल जयंती पर प्रदर्शनी और विशेष व्याख्यान, सप्तधारा रणनीति से विकसित भारत के लक्ष्य पर चर्चा

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 25 सितंबर 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर प्रदर्शनी और ‘सप्तधारा-रणनीति एवं विकसित भारत-2047 का संकल्प’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद, अंत्योदय और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, आधारभूत संरचना, रक्षा, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था तथा सॉफ्ट पावर जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के बाद अतिथियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और विचारों से जुड़ी पुस्तकों एवं सामग्री पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आयोजन सीयूएसबी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद एवं सामाजिक नीति पीठ की ओर से किया गया।

एकात्म मानववाद को ‘लास्ट फर्स्ट’ के संदर्भ में देखने की जरूरत : कुलपति

अध्यक्षीय संबोधन में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने एकात्म मानव दर्शन को ‘Putting the Last First’ के संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने सप्तधारा रणनीति को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद से जोड़ते हुए कहा कि इस दर्शन के आधार पर अकादमिक व्यवस्था को सामाजिक और राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है। कुलपति ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के संदर्भ में इसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास की प्रक्रिया में समाज के अंतिम व्यक्ति को केंद्र में रखना आवश्यक है।

भारतीय ज्ञान परंपरा को समाधान का आधार बनाने पर जोर

मुख्य वक्ता डॉ. गुरुप्रकाश ने कहा कि भारत की मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए केवल वामपंथ या दक्षिणपंथ जैसी विचारधाराओं के बीच विकल्प तलाशने के बजाय भारतीय ज्ञान परंपरा से विकसित भारतीयता के दर्शन को भी मार्गदर्शक के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में अंत्योदय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय संदर्भ और अनुभवों को आधार बनाने पर जोर दिया।

अंत्योदय और विकसित भारत को बताया परस्पर जुड़ा लक्ष्य

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ के समन्वयक एवं ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्त्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधांशु कुमार झा ने अंत्योदय और विकसित भारत-2047 के विचारों को एक-दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाए बिना विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।

सात धाराओं के अलग-अलग आयामों पर चर्चा

कार्यक्रम में डॉ. पावस कुमार ने भारत की विनिर्माण क्षमता और उपलब्धियों पर बात रखी। डॉ. हेमंत कुमार सिंह ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भारत की स्थिति और नई तकनीकों से भविष्य की संभावनाओं को सामने रखा।

प्रो. प्रभात रंजन ने डिजिटल पेमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की प्रगति तथा आगे की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं डॉ. अतीस कुमार दास ने गति शक्ति के तहत आधारभूत संरचना के विकास पर प्रकाश डाला।

प्रो. प्रणव कुमार ने विकसित भारत के लिए रक्षा क्षमता को महत्वपूर्ण बताते हुए भारत की सैन्य शक्ति की स्थिति पर चर्चा की। डॉ. धीरेंद्र कुमार ने हरित और नीली अर्थव्यवस्था के संदर्भ में सतत विकास तथा समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाएं बताईं।

डॉ. जाधव प्रताप ने विकसित भारत-2047 के संदर्भ में भारत की सॉफ्ट पावर के बहुआयामी स्वरूप और उसकी भूमिका पर चर्चा की।

शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी लिया हिस्सा

कार्यक्रम की शुरुआत संयोजिका डॉ. प्रीति अनिल खंदारे के स्वागत व्याख्यान से हुई, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजक डॉ. अनिल कुमार ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष और अधिष्ठाता समेत प्रो. पवन मिश्रा, प्रो. अनिल सिंह झा, डॉ. नीरज कुमार सिंह, डॉ. रोहित कुमार, डॉ. आनंद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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