पितृपक्ष मेले में सीयूएसबी के समाज कार्य विद्यार्थियों ने दी स्वैच्छिक सेवाएं, प्रशासनिक व्यवस्था का लिया व्यावहारिक अनुभव

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 11 अक्टूबर 2026

गयाजी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के समाज कार्य स्नातकोत्तर (एमएसडब्ल्यू) के विद्यार्थियों ने पितृपक्ष मेला-2026 के दौरान 6 से 10 अक्टूबर तक गयाजी में स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान कीं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के निर्देशानुसार आयोजित इस क्षेत्रीय अध्ययन के तहत विद्यार्थियों को मेला प्रबंधन, जनसेवा, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सामुदायिक सहभागिता का व्यावहारिक अनुभव मिला।

प्रो. एम. विजय कुमार शर्मा और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हरेश नारायण पांडेय के मार्गदर्शन में हुए इस क्षेत्रीय भ्रमण में पीएचडी शोधार्थी शिवम कुमार, प्रेम प्रकाश, प्रेरणा गौतम, कुमार सौरव मूर्ति और दीपाली कुमारी भी शामिल रहे। विद्यार्थियों को जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों, पितृपक्ष मेला समिति और गया सहित आसपास के जिलों के समाजसेवियों के साथ कार्य करने का अवसर मिला।

डीएम और आईएएस अधिकारी ने दी मेला प्रबंधन की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं पितृपक्ष मेला-2026 में गैर-सरकारी संगठनों के समन्वयक अनंत धीश अमन ने विद्यार्थियों के साथ परिचयात्मक बैठक की। इसके बाद वर्ष 2025 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नीलेश गोयल और जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने विद्यार्थियों को मेला संचालन, प्रशासनिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की जानकारी दी।

नीलेश गोयल ने विद्यार्थियों को विष्णुपद मंदिर, गया रेलवे स्टेशन, सीता कुंड, होटलों और पंडा समुदाय से जुड़े स्थलों को क्षेत्रीय सर्वेक्षण में शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और आध्यात्मिक पहलुओं के आधार पर अध्ययन करने तथा श्रद्धालुओं से प्रतिक्रिया प्राप्त करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इस तरह के सर्वेक्षण से भविष्य में जन सुविधाओं, भीड़ प्रबंधन और मेला व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासनिक पहल

बैठक में बताया गया कि पितृपक्ष मेले से स्थानीय विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर भी मिलते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बुजुर्गों एवं बच्चों की पहचान और उनके सुरक्षित पुनर्मिलन में सहायता के लिए विशेष क्यूआर कोड युक्त बैंड की व्यवस्था की थी। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में निःशुल्क रिक्शा सेवा भी उपलब्ध कराई गई।

विद्यार्थियों ने पूछे व्यावहारिक सवाल

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने मेला प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे। आईएएस अधिकारी नीलेश गोयल ने उनके सवालों के विस्तार से उत्तर दिए और क्षेत्रीय अध्ययन के महत्व को समझाया।

विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में समझने का अवसर देने के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, जनसेवा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के प्रति उनकी समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

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