सीयूएसबी में एमएमटीटीसी के पूर्वी व उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की क्षेत्रीय कार्यशाला संपन्न

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 मार्च 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सहयोग से मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (एमएमटीटीसी) के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के 15 एमएमटीटीसी के निदेशकों ने भाग लिया। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी के अधिकारियों के साथ एक्सप्रेशंस इंडिया, चेंजइंक फाउंडेशन और वाधवानी फाउंडेशन के रिसोर्स पर्सन्स भी शामिल हुए।

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रगति की हुई समीक्षा

कार्यशाला का उद्देश्य मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा, उसके परिणामों का मूल्यांकन और विभिन्न एमएमटीटीसी द्वारा अपनाई गई श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना था।

उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने सभी अतिथियों और कार्यक्रम निदेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि एमएमटीटीसी देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में भी सहायक है।

इस दौरान यूजीसी के संयुक्त सचिव डॉ. जे. के. त्रिपाठी ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए सरकार की पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों और एमएमटीटीसी के बीच सहयोग को और मजबूत करना आवश्यक है।

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मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी शिक्षा पर हुए विशेष सत्र

कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
🔹डॉ. जितेंद्र नागपाल ने “उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित अधिगम वातावरण” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
🔹चेंजइंक फाउंडेशन की सुश्री अपराजिता ने विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं (SLD) और समावेशी वातावरण पर सत्र प्रस्तुत किया।
🔹वाधवानी फाउंडेशन की डॉ. सुजाता ने समानता, समावेशन और पहुंच विषय पर व्याख्यान दिया।

कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने एमएमटीटीसी की प्रगति प्रस्तुत करते हुए अपनी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा किया। इसके बाद यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और प्रतिभागियों के बीच विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किया गया।

प्रतिभागियों ने गया के धार्मिक स्थलों का भी किया भ्रमण

जन संपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि समापन सत्र में एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. तरुण कुमार त्यागी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने गया के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों – विष्णुपद मंदिर, शंकराचार्य मठ तथा महाबोधि मंदिर  का भी दर्शन किया।

दूसरे दिन प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय परिसर में एग्रो टूरिज्म का आनंद लेते हुए मशरूम प्लांट, गोशाला, गुलाब वाटिका, धन्वंतरि वाटिका, मधुमक्खी पालन और फल-सब्जी उद्यान का भ्रमण किया तथा विश्वविद्यालय की ऑर्गेनिक खेती और ‘आत्मनिर्भर देश के लिए आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय’ की पहल की सराहना की।

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