सीयूएसबी में मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम, युवाओं को दी न्यायिक सहायता की जानकारी

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस स्थित विधिक सहायता क्लिनिक द्वारा गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), गयाजी के सहयोग से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की जागृति योजना, 2025 के अंतर्गत ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों एवं अन्य महत्वपूर्ण विधिक विषयों की जानकारी दी गई।

युवाओं में संवैधानिक चेतना बढ़ाना उद्देश्य

जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में विधिक साक्षरता एवं संवैधानिक चेतना को बढ़ावा देना तथा उन्हें अपने अधिकारों, कर्तव्यों और न्याय तक पहुंच के उपलब्ध साधनों के प्रति जागरूक करना था।

स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि युवाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की समुचित जानकारी होना जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को कानून की व्यावहारिक समझ देने के साथ संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और न्याय के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की दी जानकारी

विधिक सहायता क्लिनिक के समन्वयक प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों एवं मौलिक कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में उपलब्ध विधिक उपायों एवं सहायता तंत्र के बारे में भी बताया।

उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों की समझ और उनका पालन भी एक सशक्त लोकतांत्रिक समाज के लिए आवश्यक है।

निःशुल्क विधिक सहायता और न्याय तक पहुंच पर जोर

प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने न्याय तक पहुंच एवं निःशुल्क विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक सहायता का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी, उचित कानूनी मार्गदर्शन तथा न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में कारागार एवं हिरासत में रह रहे व्यक्तियों के विधिक अधिकारों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान विधि के शासन के तहत प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा एवं अधिकारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया।

सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान में युवाओं की भागीदारी

एनएएलएसए की जागृति योजना, 2025 के तहत अगस्त माह को ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से युवाओं में विधिक साक्षरता, किशोर न्याय एवं न्याय तक पहुंच के संबंध में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सीयूएसबी में आयोजित कार्यक्रम को युवाओं को संविधान और कानून से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

विधिक सहायता क्लिनिक के सदस्यों ने निभाई भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. सुरेन्द्र कुमार की सक्रिय भूमिका रही। सह-समन्वयक डॉ. अनन्त प्रकाश नारायण एवं डॉ. चंदना सुब्बा ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। विधिक सहायता क्लिनिक के छात्र सदस्यों ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 अगस्त 2026

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस स्थित विधिक सहायता क्लिनिक द्वारा गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), गयाजी के सहयोग से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की जागृति योजना, 2025 के अंतर्गत ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों एवं अन्य महत्वपूर्ण विधिक विषयों की जानकारी दी गई।

युवाओं में संवैधानिक चेतना बढ़ाना उद्देश्य

जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में विधिक साक्षरता एवं संवैधानिक चेतना को बढ़ावा देना तथा उन्हें अपने अधिकारों, कर्तव्यों और न्याय तक पहुंच के उपलब्ध साधनों के प्रति जागरूक करना था।

स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि युवाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की समुचित जानकारी होना जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को कानून की व्यावहारिक समझ देने के साथ संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और न्याय के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की दी जानकारी

विधिक सहायता क्लिनिक के समन्वयक प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों एवं मौलिक कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में उपलब्ध विधिक उपायों एवं सहायता तंत्र के बारे में भी बताया।

उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों की समझ और उनका पालन भी एक सशक्त लोकतांत्रिक समाज के लिए आवश्यक है।

निःशुल्क विधिक सहायता और न्याय तक पहुंच पर जोर

प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने न्याय तक पहुंच एवं निःशुल्क विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक सहायता का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी, उचित कानूनी मार्गदर्शन तथा न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में कारागार एवं हिरासत में रह रहे व्यक्तियों के विधिक अधिकारों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान विधि के शासन के तहत प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा एवं अधिकारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया।

सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान में युवाओं की भागीदारी

एनएएलएसए की जागृति योजना, 2025 के तहत अगस्त माह को ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से युवाओं में विधिक साक्षरता, किशोर न्याय एवं न्याय तक पहुंच के संबंध में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सीयूएसबी में आयोजित कार्यक्रम को युवाओं को संविधान और कानून से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

विधिक सहायता क्लिनिक के सदस्यों ने निभाई भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. सुरेन्द्र कुमार की सक्रिय भूमिका रही। सह-समन्वयक डॉ. अनन्त प्रकाश नारायण एवं डॉ. चंदना सुब्बा ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। विधिक सहायता क्लिनिक के छात्र सदस्यों ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।

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