गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा, ज्ञान और खुशियां बांटने से बढ़ती हैं : राज्यपाल सैयद अता हसनैन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 अक्टूबर 2026


गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के पंचम दीक्षांत समारोह में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बताया। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि वे आज भी अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और जीवनभर करते रहेंगे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई पूरी किए हुए 50 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी किसी गुरु का व्हाट्सएप संदेश आता है तो वे उसे सबसे पहले पढ़ते हैं। राज्यपाल ने उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई देते हुए कहा कि इस सफलता का श्रेय विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों, दोनों को जाता है।

खुशियां और ज्ञान बांटने से बढ़ते हैं : राज्यपाल

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उनके जीवन का विशेष और खुशी का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी खुशियां दूसरों के साथ साझा करने की सलाह देते हुए कहा कि खुशियां और ज्ञान बांटने से बढ़ते हैं। उन्होंने सीयूएसबी के नैक ए++ ग्रेड, यूजीसी श्रेणी-1 का दर्जा और स्वच्छ एवं हरित परिसर की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके राज्यपाल पदभार ग्रहण करने के बाद बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना के माध्यम से नवस्थापित 211 डिग्री महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के कुल 2400 पदों के लिए हुई नियुक्तियों में सीयूएसबी के 80 विद्यार्थियों का चयन हुआ। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण बताया।

राष्ट्र निर्माण के प्रति नई जिम्मेदारी निभाने का आह्वान

राज्यपाल ने कहा कि डिग्री प्राप्त कर विद्यार्थी जब समाज और राष्ट्र के व्यापक क्षेत्र में कदम रखते हैं, तो यह केवल एक शैक्षणिक पड़ाव का अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति नए दायित्व की शुरुआत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों की ऊर्जा, तकनीकी समझ और नवीन सोच को भारत को वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शक बनाने में महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह से बिहार के नागरिकों के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में भाग लेने तथा विशेष रूप से ‘टीबी मुक्त बिहार’ अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया।

मानवता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जिस भी क्षेत्र में अपना करियर बनाएं, मानवता के संरक्षण और उन्नयन के लिए योगदान अवश्य दें। उन्होंने सामाजिक हितों से समझौता नहीं करने की सलाह देते हुए अहिंसक विरोध, मानव सम्मान, संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने के साथ दूसरों के दृष्टिकोण को भी महत्व देना चाहिए।

नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा : जीतन राम मांझी

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि देश की संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान संपदा की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की सोच में बदलाव आ रहा है। आज युवा केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनना चाहते हैं। उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि ऐसी आत्मनिर्भरता की कल्पना महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी की थी।

उच्च शिक्षा और शोध में सीयूएसबी की भूमिका की सराहना

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल सिक्किम एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस अभियान में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में सीयूएसबी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने राज्यपाल, विशिष्ट अतिथियों, कार्यकारी समिति, अकादमिक समिति और अन्य गणमान्य लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बीते वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

कुलपति ने कहा कि कम समय में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय अग्रणी रहा है। बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को लागू किया गया है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में उच्चस्तरीय शोध कार्य हो रहे हैं। संकाय सदस्यों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और पेटेंट भी हासिल किए हैं। उन्होंने परिसर को हरित, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित बताया।

1662 विद्यार्थियों को डिग्री, 61 विद्यार्थियों को मिले 95 स्वर्ण पदक

पंचम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने मेधावी विद्यार्थियों को डिग्री के साथ कुलाधिपति स्वर्ण पदक, संकाय स्वर्ण पदक और विभागीय स्वर्ण पदक प्रदान किए। विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी पाठ्यक्रमों के कुल 1662 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। वहीं, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 61 विद्यार्थियों को कुल 95 स्वर्ण पदक दिए गए।

वर्ष 2023 के लिए दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 11 को संकाय स्वर्ण पदक और 29 को विभागीय स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। वर्ष 2024 के लिए दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 11 को संकाय स्वर्ण पदक और 32 को विभागीय स्वर्ण पदक दिए गए।

पहली बार आठ विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में पहली बार आठ विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें डॉ. मंजू करण स्मृति चिह्न, शेओधारी स्मारक स्वर्ण पदक, श्री विश्वनाथ डालमिया स्मारक स्वर्ण पदक, आनंदी देवी डालमिया स्मारक स्वर्ण पदक, कमला देवी स्मारक स्वर्ण पदक तथा डॉ. बिंदेश्वर पाठक स्वर्ण पदक शामिल हैं।

मेडल वितरण के दौरान परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांतिगोपाल पाइन ने औपचारिक घोषणाएं कीं। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार ने किया, जबकि मंच संचालन लाइफ साइंस विभाग की डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया।

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