सीयूएसबी पूर्णतः रैगिंग मुक्त परिसर, विद्यार्थियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 24 जुलाई 2026,
गयाजी: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में नवप्रवेशित स्नातकोत्तर (पीजी) विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ-2026’ के दौरान कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय पूर्णतः रैगिंग मुक्त परिसर है और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थान जीरो टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) की नीति पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी प्रकार की रैगिंग या मानसिक प्रताड़ना को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।
रैगिंग रोकने के लिए सक्रिय है एंटी-रैगिंग टीम
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय नवप्रवेशित विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से समझता है। इसी उद्देश्य से परिसर में एक समर्पित एंटी-रैगिंग टीम कार्यरत है, जो नए विद्यार्थियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के साथ उन्हें किसी भी प्रकार की रैगिंग गतिविधि में शामिल न होने के लिए जागरूक करती है।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड संभालता है अनुशासन और सुरक्षा की जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड परिसर में अनुशासन बनाए रखने, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने तथा समग्र कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
रैगिंग, नशा और प्लास्टिक मुक्त है परिसर
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि अभिमुखीकरण कार्यक्रम में सहायक प्रॉक्टर एवं एंटी-रैगिंग प्रकोष्ठ के नोडल पदाधिकारी डॉ. जावेद अहसन ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय के नियमों एवं सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि परिसर रैगिंग मुक्त, नशा मुक्त और प्लास्टिक मुक्त है तथा सभी विद्यार्थियों से जाति, धर्म, रंग, नस्ल, लिंग, समुदाय अथवा क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना गरिमापूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।
रैगिंग को माना जाता है गंभीर अपराध
डॉ. जावेद अहसन ने कहा कि विश्वविद्यालय रैगिंग को गंभीर अपराध मानता है और इसमें संलिप्त पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक वर्ष एंटी-रैगिंग दिवस एवं एंटी-रैगिंग सप्ताह का आयोजन किया जाता है। साथ ही वर्षभर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है। परिसर में सक्रिय एंटी-रैगिंग समिति और विभिन्न एंटी-रैगिंग स्क्वॉड लगातार निगरानी करते हैं।
विद्यार्थियों को काउंसलिंग सुविधा की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सभी 18 सदस्य उपस्थित रहे। उप-प्रॉक्टर डॉ. मंगलेश कुमार मंगलम ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स काउंसलिंग एंड वेल-बीइंग सेंटर की जानकारी देते हुए बताया कि यहां विद्यार्थियों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श (साइकोलॉजिकल काउंसलिंग) की सुविधा उपलब्ध है, ताकि वे किसी भी मानसिक या शैक्षणिक समस्या का समाधान विशेषज्ञों की मदद से प्राप्त कर सकें।
