सीयूएसबी के बीए-बीएड विद्यार्थियों को युवा शोध प्रतिभा योजना के तहत आईसीएसएसआर से 3 लाख रुपये का अनुदान

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 07 अक्टूबर 2026

गयाजी: स्नातक स्तर पर शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली ने ‘युवा शोध प्रतिभा योजना: युवा और उपनिवेश-मुक्ति’ के अंतर्गत सीयूएसबी के चार वर्षीय बीए-बीएड पाठ्यक्रम की तीन छात्राओं को 3 लाख रुपये की शोध सहायता राशि स्वीकृत की है।

‘उपनिवेश-मुक्त संज्ञान’ पर होगा शोध

आईसीएसएसआर की ओर से बीए-बीएड पाठ्यक्रम के सातवें सेमेस्टर की छात्राओं सानिया अंसारी, शुभांगी सिंह और बिनीता सिंह को ‘शिक्षण-पूर्व शिक्षकों में उपनिवेश-मुक्त संज्ञान: सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक आत्म-सम्मान के साथ संबंध’ विषय पर शोध परियोजना के लिए अनुदान दिया गया है।

परियोजना में समकालीन महत्व के विषय ‘उपनिवेश-मुक्त संज्ञान’, यानी औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसके सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक आत्म-सम्मान के साथ संबंध का अध्ययन किया जाएगा।

स्नातक स्तर पर शोध संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

यह अनुदान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा-केंद्रित अध्ययन से आगे बढ़कर खोज, जिज्ञासा, अनुसंधान और ज्ञान-सृजन की प्रक्रिया से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि इस तरह के अवसर विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ आलोचनात्मक चिंतन और अकादमिक दृष्टिकोण को मजबूत करने में सहायक होंगे।

शिक्षक शिक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण परियोजना

शोध दल के निर्देशक एवं पर्यवेक्षक प्रो. रवि कांत ने कहा कि शिक्षक शिक्षा के दृष्टिकोण से यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसमें उपनिवेश-मुक्ति से संबंधित उभरते विमर्श को सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक आत्म-सम्मान से जोड़कर अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल अधिक से अधिक स्नातक विद्यार्थियों को शोध के प्रति रुचि विकसित करने तथा सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण शैक्षणिक विषयों के अध्ययन में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

NEP 2020 की दृष्टि के अनुरूप पहल

सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस दृष्टि के अनुरूप है, जिसमें बहुविषयक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन, शोध और नवाचार पर विशेष बल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि स्नातक स्तर पर शोध परियोजनाओं के लिए इस प्रकार की सहायता विद्यार्थियों को अकादमिक अनुसंधान की बुनियादी प्रक्रियाओं से परिचित कराने के साथ उन्हें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण विषयों पर स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

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