बिहार में अल नीनो का असर: कम बारिश के बीच किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी जारी

0
Screenshot_2026_0801_134348.jpg
Share with

आर्यावर्त वाणी | पटना | 01 अगस्त 2026,

पटना: बिहार में मानसून की कमजोर स्थिति और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने किसानों के लिए विस्तृत कृषि परामर्श जारी किया है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि जून से जुलाई के अंत तक राज्य में सामान्य से करीब 41 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जिससे खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

कई जिलों में बारिश की भारी कमी

वैज्ञानिकों के अनुसार, जहानाबाद और सीतामढ़ी में 64 प्रतिशत, जबकि भागलपुर में 61 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। हालांकि मेघगर्जन और वज्रपात को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

धान की रोपाई जल्द पूरी करने की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा है कि धान की रोपाई अगस्त के पहले सप्ताह तक हर हाल में पूरी कर लें। देरी होने पर उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। बेहतर उत्पादन के लिए 18 से 25 दिन पुराने पौधों का उपयोग करने और पौधों के बीच की दूरी 15×15 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है।

वैकल्पिक फसलों पर दें जोर

पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसानों को धान की जगह अरहर, मक्का और रागी जैसी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही अरहर के साथ मक्का, तिल और उड़द की मिश्रित खेती को भी लाभदायक बताया गया है।

जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई अपनाने की अपील

वैज्ञानिकों ने वर्षा जल संचयन, खेतों की मेड़ों को मजबूत करने, तालाब, चेक डैम, रिचार्ज पिट, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग तथा धान की खेती में वैकल्पिक गीला एवं सूखा सिंचाई पद्धति अपनाने की भी अनुशंसा की गई है।

जैविक खाद और संतुलित पोषण पर जोर

एडवाइजरी में गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ यूरिया को एक साथ देने के बजाय तीन से चार किस्तों में देने की सलाह दी गई है। फसलों में पोषण की कमी दूर करने के लिए 2 प्रतिशत यूरिया या एनपीके घोल का पत्तियों पर छिड़काव करने की भी अनुशंसा की गई है।

कीट एवं जलभराव से बचाव के उपाय

वैज्ञानिकों ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने, फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप का उपयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करने की सलाह दी है। वहीं, अधिक बारिश होने की स्थिति में धान, मक्का, तिल और अरहर के खेतों से जल निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

पशुपालकों को भी दी गई सलाह

तेज बारिश और खराब मौसम की स्थिति में पशुओं को सुरक्षित शेड में रखने तथा उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page