भारत सेवाश्रम संघ में सनातन हिन्दू धर्म-शिक्षा संस्कृति सम्मेलन, भारतीय शिक्षा संस्कृति के आदर्श पर हुई चर्चा
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 अक्टूबर 2026
गयाजी: पितृपक्ष के पावन अवसर पर भारत सेवाश्रम संघ, गयाजी के परिसर में गुरुवार को सनातन हिन्दू धर्म-शिक्षा संस्कृति सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में ‘भारतीय शिक्षा संस्कृति का आदर्श’ विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में प्रधान अतिथि के रूप में गया कॉलेज, गयाजी के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र की गरिमामय उपस्थिति रही। उन्होंने भारतीय शिक्षा संस्कृति की परंपरा, उसके मूल्यों और जीवन निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
गयाजी और गयासुर के धार्मिक महत्व पर प्रकाश
प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने अपने संबोधन में गयाजी और गयासुर से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की चर्चा की। उन्होंने सनातन परंपरा में गयाजी के विशेष स्थान और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा कृतित्व के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से बताया।
उन्होंने पिंडदान की महत्ता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान की परंपरा सनातन हिन्दू धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है।
साधु-संतों की रही उपस्थिति
सम्मेलन में गया कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. मार्कण्डेय पाण्डेय सहित अनेक साधु-संत एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान भारतीय शिक्षा, संस्कृति, सनातन परंपराओं और पितृपक्ष के आध्यात्मिक महत्व को लेकर विचार साझा किए गए।
