सीयूएसबी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खेल विज्ञान के एकीकरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 अक्टूबर 2026
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गुरुवार को उद्घाटन हुआ। शिक्षा संकाय के अंतर्गत संचालित शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित संगोष्ठी का विषय ‘शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण : अवसर, चुनौतियाँ एवं भविष्य की संभावनाएँ’ है।
संगोष्ठी का उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन की निगरानी, चोट की भविष्यवाणी, रणनीतिक विश्लेषण, स्वास्थ्य संबंधी निदान और मानवीय प्रदर्शन जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों से हो रहे बदलावों को समझना तथा इस विषय पर अकादमिक संवाद को आगे बढ़ाना है।
बिहार खेल विश्वविद्यालय के कुलपति ने तकनीकी नवाचार पर रखे विचार
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर के कुलपति शिशिर सिन्हा शामिल हुए। उन्होंने खेलों में तकनीकी नवाचार, खिलाड़ियों के प्रदर्शन के वैज्ञानिक विश्लेषण और खेल विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भविष्य की संभावनाओं पर विचार रखे।
उन्होंने कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को तेजी से अपनाया जा रहा है, लेकिन यह मानव मस्तिष्क की विशिष्ट क्षमताओं का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने मानवीय मूल्यों से समझौता किए बिना नैतिकता के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर जोर दिया।
‘सूचना प्रौद्योगिकी और भारतीय प्रतिभा भारत का भविष्य’
अध्यक्षीय संबोधन में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र ‘सूचना प्रौद्योगिकी + भारतीय प्रतिभा = भारत का भविष्य’ का उल्लेख करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी और भारतीय प्रतिभा को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उम्मीद जताई कि यहां होने वाले विमर्श से ऐसे सार्थक निष्कर्ष सामने आएंगे, जिन्हें नीति-निर्माताओं के साथ साझा किया जा सके। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में शिक्षा एवं खेल विज्ञान के बदलते परिदृश्य, अनुसंधान एवं नवाचार की आवश्यकता तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उभरते अवसरों पर भी विचार व्यक्त किए।
रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाया एआई का उपयोग
सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने दैनिक जीवन और रोजमर्रा के कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से संगोष्ठी के विषय को संवादात्मक तरीके से समझाया।
कार्यक्रम निदेशक एवं शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आशीष कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन में संगोष्ठी की प्रासंगिकता, शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान में एआई की भूमिका तथा इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहलों पर प्रकाश डाला।
250 प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण, 172 शोध-पत्र स्वीकार
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राहुल सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान के बीच बढ़ते अंतर्संबंध तथा संगोष्ठी के विभिन्न अकादमिक आयामों पर प्रकाश डाला।
सीयूएसबी के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि संगोष्ठी के लिए कुल 250 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि शोध-पत्र प्रस्तुति के लिए 172 शोध-पत्र स्वीकार किए गए हैं।
उद्घाटन सत्र के बाद विशेषज्ञों ने संगोष्ठी के विषय पर व्याख्यान दिए। इसके बाद विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में प्रो. रवि कांत, प्रो. उषा तिवारी सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र के अंत में प्रो. उषा तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
