रूस की पांच महिलाओं ने गयाजी में किया पिंडदान, फल्गु, विष्णुपद और अक्षयवट पर पूर्वजों को दी श्रद्धांजलि

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 अक्टूबर 2026

गयाजी: गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता का एक अनूठा उदाहरण गुरुवार को देखने को मिला, जब रूस की पांच महिलाओं ने अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और सद्गति की कामना को लेकर गयाजी में विधि-विधान से पिंडदान किया। रूस से आईं नीना हारा, अनास्तासिया इस्मागिलोवा, यूलिया लावरेन्तिएवा, केसेनिया अब्रामोवा और ल्यूडमिला शालामोवा ने फल्गु नदी के तट पर स्थित ओडिशा भवन परिसर में पिंडदान किया। पिंडदान के दौरान सभी महिलाएं भावुक नजर आईं। पूर्वजों को श्रद्धा और प्रेम के साथ पिंड अर्पित करते समय उनकी आंखों में आंसू भी छलक पड़े।

फल्गु, विष्णुपद और अक्षयवट में किया पिंडदान

इन महिलाओं का 6 अक्टूबर को गयाजी में आगमन हुआ था। 7 अक्टूबर को उन्होंने गयाजी और बोधगया के विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण किया। गुरुवार को उन्होंने फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट में अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान एवं श्रद्धा अर्पित की।

इस्कॉन अध्यक्ष ने बताया वैदिक परंपराओं के प्रति बढ़ता आकर्षण

इस अवसर पर इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष जगदीश श्याम दास ने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति दुनिया के विभिन्न देशों के लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि रूस की पांच महिलाएं अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने गयाजी पहुंची हैं। उनके अनुसार, यह गयाजी और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस्कॉन 150 से अधिक देशों में वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़ा है।

युधेश्वरी राधा दासी ने किया प्रेरित

इस्कॉन अध्यक्ष के अनुसार, इन रूसी महिलाओं को गयाजी में पिंडदान के लिए युधेश्वरी राधा दासी (यूलिया कुश्का) ने प्रेरित किया। बताया गया कि युधेश्वरी राधा दासी पिछले वर्ष जुलाई में श्री जगन्नाथ रथयात्रा के अवसर पर इस्कॉन आई थीं और उन्होंने स्वयं गयाजी में पिंडदान किया था।

गयाजी में पिंडदान की धार्मिक महत्ता और अपने अनुभवों से प्रभावित होकर उन्होंने रूस की इन पांच महिलाओं को भी गयाजी आने और अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करने के लिए प्रेरित किया। वह स्वयं भी इन महिलाओं के साथ गयाजी पहुंचीं और तीर्थयात्रा के दौरान उनका मार्गदर्शन किया।

प्रेम और कृतज्ञता के रूप में किया पिंडदान

रूस से आईं महिलाओं ने गयाजी में पिंडदान को अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और श्रद्धा की अभिव्यक्ति के रूप में किया। फल्गु नदी के तट पर पिंडदान के दौरान माहौल भावुक और आध्यात्मिक नजर आया।

गयाजी सदियों से श्राद्ध और पिंडदान के लिए प्रसिद्ध तीर्थस्थल रहा है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और सद्गति की कामना लेकर पहुंचते हैं। रूस की इन पांच महिलाओं का गयाजी आकर पिंडदान करना गयाजी की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पहचान और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि का एक उदाहरण है।

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