सीयूएसबी में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर व्याख्यान, पेटेंट कानून के वैश्विक और भारतीय विकास की दी जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 07 अक्टूबर 2026
गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के अंतर्गत संचालित आईपीआर कमिटी की ओर से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) पर परिचयात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों की मूल अवधारणा पर चर्चा
मुख्य वक्ता स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस (एसएलजी) के प्रो. प्रदीप कुमार दास ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की मूल अवधारणा से व्याख्यान की शुरुआत की। उन्होंने विद्यार्थियों को आईपीआर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अधिकारों की जानकारी देते हुए इसके उद्भव और ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. दास ने बताया कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के अंतर्गत सात प्रमुख प्रकार के अधिकार शामिल हैं। उन्होंने इसके अंतरराष्ट्रीय विकास में ट्रिप्स (TRIPS) समझौते की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की।
प्रमुख विधिवेत्ताओं और सिद्धांतों से कराया परिचित
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के विकास से जुड़े विभिन्न सिद्धांतों तथा प्रमुख विधिवेत्ताओं के योगदान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वैश्विक स्तर पर पेटेंट कानून का विकास हुआ और आधुनिक समय में इसे औपचारिक कानूनी स्वरूप प्राप्त हुआ।
उन्होंने भारत में पेटेंट कानून के अधिनियमन तथा इसके क्रमिक विकास की भी जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को वैश्विक और भारतीय संदर्भ में बौद्धिक संपदा अधिकारों को समझने का अवसर प्रदान किया।
विद्यार्थियों को मिला आईपीआर की समग्र समझ का अवसर
व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की मूल अवधारणा, उसके सैद्धांतिक आधार, प्रमुख विधिवेत्ताओं के योगदान तथा पेटेंट कानून के वैश्विक एवं भारतीय विकास की समग्र जानकारी मिली।
कार्यक्रम में आईपीआर कमिटी की संकाय समन्वयक डॉ. निहारिका सिंह, सहायक प्राध्यापक डॉ. पूनम कुमारी एवं डॉ. मणि प्रताप, स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस उपस्थित रहे।
