पितृपक्ष में ISKCON गयाजी में 15 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 27 सितंबर 2026

गयाजी: पितृपक्ष के अवसर पर ISKCON गयाजी में रविवार से 15 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। आयोजन में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और भक्ति के आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराया जा रहा है। कथा के दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने का संदेश भी दिया जा रहा है।

श्रीमद्भागवत के महत्व पर हुई चर्चा

कथा का प्रवचन ISKCON मंदिर गयाजी के अध्यक्ष श्री जगदीश श्याम दास कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने श्रीमद्भागवत के स्वरूप, उसके माहात्म्य और श्रद्धापूर्वक इसके श्रवण के आध्यात्मिक प्रभाव पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप के समान है। श्रद्धा के साथ इसके श्रवण से मन और चित्त की शुद्धि होती है तथा व्यक्ति में भक्ति की भावना विकसित होती है।

उद्धव, चार कुमार और गोकर्ण के प्रसंगों का उल्लेख

कथा के दौरान श्री जगदीश श्याम दास ने श्रीमद्भागवत के प्राकट्य और इसके श्रवण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने उद्धव जी द्वारा द्वारका की रानियों को श्रीमद्भागवत का उपदेश दिए जाने, चार कुमारों द्वारा हरिद्वार स्थित सप्तऋषि आश्रम में श्रीमद्भागवत का कथन किए जाने तथा गोकर्ण द्वारा अपने भाई के उद्धार के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आश्रय लेने के प्रसंगों को बताया।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में देखने के बजाय भगवान श्रीकृष्ण की वाणी और उनके दिव्य स्वरूप के रूप में समझना चाहिए। इसके श्रवण से व्यक्ति को भक्ति और आध्यात्मिक जीवन की दिशा मिलती है।

पितृपक्ष में कथा श्रवण को बताया विशेष अवसर

पितृपक्ष के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है। इस दौरान श्रीमद्भागवत का श्रवण श्रद्धा के साथ आध्यात्मिक जीवन को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।

15 दिनों तक चलेगा आयोजन

ISKCON गयाजी में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा 15 दिनों तक चलेगी। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों पर कथा होगी। कथा के बाद श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने गयाजी धामवासियों और श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर श्रीमद्भागवत का श्रवण करने की अपील की है।

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