बोधगया थाना के अनुसंधानकर्ता निलंबित, कांड के अनुसंधान में लापरवाही का आरोप
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 24 सितंबर 2026
गयाजी: मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने अपने अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत फिर से एक बड़ी कार्रवाई की है। गंभीर मारपीट के एक मामले के अनुसंधान में लापरवाही बरतने के आरोप में बोधगया थाना के अनुसंधानकर्ता पु०अ०नि० राकेश कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, गयाजी निर्धारित किया गया है।
मारपीट के बाद दर्ज हुआ था मामला
मामला बोधगया थाना कांड संख्या 462/2026 से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, मोचारिम गांव की रहने वाली रेखा देवी ने 8 सितंबर 2026 को पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र के कार्यालय में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि साधु यादव ने उनके पति हिरालाल यादव के साथ मारपीट कर उनका सिर फोड़ दिया। पति को बचाने पहुंचने पर उनके साथ भी गाली-गलौज किए जाने का आरोप लगाया गया था।
रेखा देवी के अनुसार, घायल हिरालाल यादव को पहले बोधगया पीएचसी ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल, गयाजी रेफर किया गया। वहां से चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए IGIMS पटना रेफर किया था। इसके बाद बोधगया थाना में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।
प्राथमिकी अभियुक्त गिरफ्तार होकर गया था जेल
पुलिस के मुताबिक, मामले के प्राथमिकी अभियुक्त साधु यादव को 3 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
बाद में जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अनुसंधानकर्ता राकेश कुमार सिंह से कांड दैनिकी और जख्म जांच प्रतिवेदन मांगा था। आरोप है कि संबंधित दस्तावेज न्यायालय में समय पर प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद अभियुक्त को जमानत मिल गई।
जेल से बाहर आने के बाद धमकी देने का आरोप
शिकायत के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद साधु यादव ने रेखा देवी के घर पहुंचकर केस में सुलह करने की धमकी दी। आरोप है कि सुलह नहीं करने पर गोली मारने की धमकी भी दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र विकास वैभव की ओर से पूरे प्रकरण की जांच अंचल पुलिस निरीक्षक, बोधगया से कराई गई।
जांच में सामने आई अनुसंधान संबंधी खामियां
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अनुसंधानकर्ता राकेश कुमार सिंह ने 30 अगस्त 2026 को कांड दैनिकी संख्या 1 से 5 और कंडिका 1 से 34 तक मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की थी। हालांकि, इसमें घायल व्यक्ति का जख्म जांच प्रतिवेदन प्राप्त कर प्रस्तुत नहीं किया गया था।
जांच में यह भी पाया गया कि अनुसंधानकर्ता की ओर से चिकित्सा पदाधिकारी से घायल का जख्म जांच प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया था।
प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार मानते हुए कार्रवाई
उपलब्ध तथ्यों और जांच रिपोर्ट के परीक्षण के आधार पर पुलिस विभाग ने प्रथम दृष्टया माना कि अनुसंधानकर्ता की ओर से कांड के अनुसंधान में शिथिलता बरती गई और इससे प्राथमिकी अभियुक्त को न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित लाभ मिलने की स्थिति बनी।
इसी आधार पर राकेश कुमार सिंह के खिलाफ गंभीर कदाचार के आरोप में निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय कार्रवाई भी शुरू करने का आदेश दिया गया है।
पुलिस महानिरीक्षक ने जवाबदेही को लेकर दिया स्पष्ट संदेश
पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र विकास वैभव ने कहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों के अनुसंधान में गुणवत्ता, निष्पक्षता और जवाबदेही से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कर्तव्य में लापरवाही या संदिग्ध कार्यशैली सामने आने पर संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
