सीयूएसबी में ‘टेक्नोलॉजी विज़न 2035’ पर मंथन, विद्यार्थियों से नवाचार का हिस्सा बनने का आह्वान
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 24 सितंबर 2026
गयाजी: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) में ‘टेक्नोलॉजी विज़न 2035’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संस्थान नवाचार परिषद (आईआईसी) की ओर से विवेकानंद व्याख्यान परिसर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ भविष्य की तकनीक, नवाचार और भारत की विकास-यात्रा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. प्रभात रंजन, सीईओ एवं सह-संस्थापक, एएसपीएल फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड तथा डी.वाई. पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे के पूर्व कुलपति ने विचार रखे।
1993 में शुरू हुई थी टेक्नोलॉजी विज़न की पहल
प्रो. प्रभात रंजन ने टेक्नोलॉजी विज़न की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए बताया कि इसकी परिकल्पना वर्ष 1993 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के कार्यकाल के दौरान टीआईएफएसी के अंतर्गत शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी विज़न को भविष्यवाणी के तौर पर नहीं, बल्कि देश की आवश्यकताओं और उपलब्ध तकनीकी संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए रणनीतिक रोडमैप के रूप में समझना चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, आवास और दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को भारत की प्रमुख भविष्य की जरूरतों से जोड़ा। उनके अनुसार तकनीक का लक्ष्य केवल सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी होना चाहिए।
AI से क्वांटम कंप्यूटिंग तक तकनीकी क्षेत्रों पर चर्चा
संगोष्ठी में जनरेटिव एआई, वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई, उन्नत ऊर्जा, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, क्वांटम कंप्यूटिंग, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उच्च शिक्षा में व्यक्तिगत एआई शिक्षक, वर्चुअल लैब और परियोजना आधारित शिक्षा की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।
प्रो. रंजन ने विद्यार्थियों से तकनीक का केवल इस्तेमाल करने के बजाय उसके विकास और नवाचार में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “एआई का उपयोग सीखने और नवाचार के लिए करें, नकल के लिए नहीं।”
ऐसी तकनीक की जरूरत जो समाज की जरूरतों से जुड़ी हो
अपने संबोधन में उन्होंने ऐसी तकनीकी दृष्टि विकसित करने पर जोर दिया, जो देश की वास्तविक जरूरतों से जुड़ी हो। उन्होंने सुरक्षा, समृद्धि और भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने में तकनीक की भूमिका पर भी विचार साझा किए।
कार्यक्रम कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित किया गया। इस दौरान आईआईसी अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह, प्रो. दुर्गविजय सिंह, प्रो. विनोद कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, आईआईसी समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
