छह शहरों में शहरी जैव विविधता अध्ययन को लेकर CUSB-BSBB की समीक्षा कार्यशाला, विशेषज्ञों ने साझा किए अंतरिम निष्कर्ष
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 18 सितंबर 2026
गयाजी : बिहार में शहरी जैव विविधता एवं सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स (CBI) अध्ययनों की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) एवं बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड (BSBB) के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला-सह-समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत ज्योति, आईएफएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में हुई। इसमें देश के विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
विभिन्न शोध टीमों ने प्रस्तुत की अध्ययन की प्रगति
सीयूएसबी के प्रधान अन्वेषक प्रो. राम प्रताप सिंह के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विभिन्न शोध दलों ने अपने अंतरिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। इनमें क्षेत्रीय सर्वेक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, शहरी शासन व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से जुड़े अध्ययन शामिल रहे।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, सीएसआईआर-नीरी, आईआईएचएस बेंगलुरु, बीआईटी-मेसरा एवं बीआईटी-पटना, एनआईटी-पटना, कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस पटना, पटना विश्वविद्यालय, ए.एन. कॉलेज तथा सीआईएमपी की शोध टीमों ने अपने-अपने अध्ययनों की प्रगति साझा की।
छह प्रमुख शहरी क्षेत्रों को किया गया है अध्ययन में शामिल
इस अध्ययन के अंतर्गत बिहार के छह प्रमुख शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें बिहारशरीफ-राजगीर-नालंदा-पावापुरी, पटना, गयाजी, भागलपुर, आरा-बक्सर तथा मुजफ्फरपुर शामिल हैं। कार्यशाला के दौरान प्रारंभिक निष्कर्षों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया तथा विभिन्न संस्थानों ने एक-दूसरे के साथ आंकड़े और ज्ञान-संसाधन साझा किए।
शहरी जैव विविधता बढ़ाने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका : कुलपति
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि इस प्रकार के बहु-संस्थागत प्रयास विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न संस्थानों के परिसरों सहित शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने शोध संस्थानों के बीच सहयोग और आंकड़ों के आदान-प्रदान को उपयोगी बताया।
बिहार में इस तरह का सहयोगात्मक प्रयास महत्वपूर्ण : भरत ज्योति
बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत ज्योति ने कहा कि शहरी जैव विविधता के अध्ययन और सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स की गणना के लिए इस प्रकार का बहु-संस्थागत सहयोगात्मक प्रयास भारत, विशेषकर बिहार में, अपने तरह का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय को अध्ययन की गुणवत्ता के लिए आवश्यक बताया।
पक्षियों के घोंसले और जीवन-चक्र का अध्ययन भी अहम
प्रधान अन्वेषक प्रो. राम प्रताप सिंह ने समीक्षा बैठक का संचालन एवं समन्वय करते हुए गया-बोधगया, मुजफ्फरपुर तथा आरा-बक्सर से संबंधित सीयूएसबी के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पक्षियों के घोंसले बनाने के व्यवहार का अध्ययन किसी शहर द्वारा समर्थित पक्षियों के संपूर्ण जीवन-चक्र, जिसमें प्रजनन भी शामिल है, का अधिक वास्तविक आकलन करने में मदद कर सकता है। इससे जैव विविधता से संबंधित आंकड़े अधिक विश्वसनीय और पारिस्थितिकी की दृष्टि से उपयोगी बन सकते हैं।
भागलपुर की जैव विविधता समझने में चमगादड़ों का अध्ययन उपयोगी
आईआईएचएस के अधिष्ठाता प्रो. जगदीश के ने भागलपुर से संबंधित अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में चमगादड़ों की उपस्थिति एवं उनके व्यवहार का अध्ययन भागलपुर की शहरी जैव विविधता को समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है।
नियमित निगरानी और जल निकायों के संरक्षण पर जोर
बैठक के समापन पर विशेषज्ञों ने विभिन्न ऋतुओं में नियमित जैव विविधता निगरानी की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। साथ ही महत्वपूर्ण घोंसला बनाने वाले वृक्षों के संरक्षण, आवासीय क्षेत्रों के बीच पारिस्थितिक संपर्क को बहाल करने तथा शहरी जल निकायों के संरक्षण को आवश्यक बताया गया।
कार्यशाला में सीयूएसबी के प्रो. विनोद कुमार (प्रधानमंत्री प्रोफेसर), प्रो. दुर्ग विजय सिंह (निदेशक, अनुसंधान एवं विकास सेल), एसईबीईएस के अधिष्ठाता प्रो. रिजवानुल हक, लाइफ साइंस विभागाध्यक्ष प्रो. गौतम कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं शोध से जुड़े अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
